■ दुर्लभ पांडुलिपियों पर सहयोग की तैयारी

● लखनऊ
अयोध्या में रामकथा से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल आकार लेती दिख रही है। रामपुर रजा लाइब्रेरी और अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के बीच ऐतिहासिक पांडुलिपियों के संरक्षण व प्रदर्शन को लेकर सहयोग की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इसी क्रम में लाइब्रेरी के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने संग्रहालय के संयोजक संजीव कुमार से मुलाकात कर कई अहम प्रस्ताव साझा किए। यह पहल उस अपील के बाद तेज हुई, जिसमें संग्रहालय के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने देशभर की संस्थाओं से दुर्लभ पांडुलिपियां और पुरावशेष साझा करने का आग्रह किया था।
रामपुर रजा लाइब्रेरी ने सोलहवीं-सत्रहवीं शताब्दी की राम साहित्य से जुड़ी दुर्लभ पांडुलिपियों की मूल प्रतियां देने के बजाय उनकी ‘फैक्सिमाइल कॉपी’ उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा है। संसदीय नियमों के चलते मूल पांडुलिपियों को स्थानांतरित करना संभव नहीं है, इसलिए उनकी प्रतिकृतियां ही अयोध्या लाई जाएंगी। इस प्रस्ताव पर ट्रस्ट स्तर पर विचार जारी है और संग्रहालय के पूर्ण होने के बाद इन्हें प्रदर्शित करने की योजना है।
डॉ. मिश्र के अनुसार, लाइब्रेरी में फारसी भाषा में श्रीमद्भागवत का एक अत्यंत दुर्लभ और अलंकृत अनुवाद मौजूद है, जिसमें सोने के पानी से कलात्मक सज्जा की गई है। इस धरोहर और उससे जुड़े चित्रों की संयुक्त प्रदर्शनी आयोजित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
विशेष बात यह है कि लाइब्रेरी में विश्व की 100 से अधिक रामायणों में से 15 का संकलन हो चुका है और लक्ष्य सभी उपलब्ध रामायणों को एक मंच पर लाना है। अब तक विश्व में लगभग 40-45 रामायणों का प्रकाशन हो चुका है, जबकि अन्य पर कार्य जारी है।
यह संभावित साझेदारी अयोध्या को रामायण शोध और सांस्कृतिक विरासत के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
