
● मुजफ्फरपुर
कठिन हालातों में सपनों को सच करने की मिसाल बनकर उभरी हैं मुजफ्फरपुर की माही कुमारी। सिकंदरपुर स्थित मुक्ति धाम में पढ़ाई करने वाली इस बेटी ने बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा में 454 अंक हासिल कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है।
माही का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उनके पिता गरीबनाथ सहनी जेल चौक पर सब्जी बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जबकि मां सुनैना देवी भी सहयोग करती हैं। सात बहनों में सबसे छोटी माही ने अभावों के बीच भी बड़े सपने देखे और उन्हें साकार करने की ठान ली। उनका लक्ष्य भविष्य में आईएएस अधिकारी बनना है।

माही की पढ़ाई का सफर भी बेहद असाधारण रहा। तीसरी कक्षा से ही उन्होंने ‘अप्पन पाठशाला’ में पढ़ाई शुरू की, जो मुक्ति धाम में संचालित होती है। पिछले सात वर्षों से वह जलती चिताओं के बीच बैठकर रोजाना लगभग आठ घंटे अध्ययन करती रहीं। जहां लोग जाने से भी हिचकते हैं, वहीं माही ने उसी स्थान को अपनी साधना का केंद्र बना लिया।
आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद माही ने कभी हार नहीं मानी। उनका मानना है कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि लगन और आत्मविश्वास के साथ हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

‘अप्पन पाठशाला’ भी अब जरूरतमंद बच्चों के लिए आशा की किरण बन चुकी है, जहां करीब 100 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा में यहां से दो छात्र शामिल हुए, जिनमें माही का प्रदर्शन सबसे उत्कृष्ट रहा।
