- प्रदूषण ने छीन लिया परिंदों का बसेरा
- फ्लेमिंगो ने किया नवी मुंबई से किनारा

■ नवी मुंबई
जो शहर कभी गुलाबी फ्लेमिंगो की चहचहाहट से गुलजार रहता था, वहां अब खामोशी का खतरा मंडरा रहा है। ठाणे क्रीक फ्लैमींगो संक्चुअरी के आसपास इस साल एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, फ्लेमिंगो झुंड में आ रहे हैं, लेकिन उतरने से कतरा रहे हैं!
पर्यावरण कार्यकर्ताओं और बर्ड वॉचर्स का कहना है कि नेरुल के वेटलैंड्स, जो कभी इन पक्षियों का पसंदीदा ठिकाना थे, अब उनके लिए असुरक्षित हो चुके हैं। DPS, NRI और T.S. चाणक्य जैसे जलक्षेत्रों के ऊपर फ्लेमिंगो चक्कर लगाकर वापस लौट रहे हैं, यह साफ संकेत है कि पर्यावरण में कुछ गंभीर गड़बड़ है।
जहर बनता पानी, भागते परिंदे

विशेषज्ञों के मुताबिक, पानी में TDS स्तर 23,000 mg/L तक पहुंच गया है, जबकि बो ओ डी और सी ओ डी भी खतरनाक स्तर पर हैं। यानी पानी अब जीवन नहीं, जहर बन चुका है।
कार्यकर्ताओं ने इसके पीछे शहरी ड्रेनेज की खराब व्यवस्था और ज्वार-भाटा के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा को जिम्मेदार ठहराया है। तेजी से हो रहे निर्माण और लापरवाही ने वेटलैंड्स का संतुलन बिगाड़ दिया है।
फ्लेमिंगो सिर्फ पक्षी नहीं, बल्कि प्रकृति के ‘बायो-इंडिकेटर’ हैं। उनका इस तरह दूर रहना इस बात का संकेत है कि पूरा इकोसिस्टम खतरे में है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो न सिर्फ फ्लेमिंगो बल्कि पूरा वेटलैंड इकोसिस्टम खत्म हो सकता है।
