■ घरेलू आपूर्ति पर फोकस

● नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को लेकर बड़ा और रणनीतिक निर्णय लेते हुए डीजल तथा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। वित्त मंत्रालय के ताजा आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कदम देश में ऊर्जा संतुलन बनाए रखने और घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
नई व्यवस्था के तहत डीजल पर निर्यात शुल्क 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पहले के मुकाबले काफी अधिक है। वहीं, एटीएफ पर भी ड्यूटी 29.5 रुपये से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। इस फैसले से संकेत मिलता है कि सरकार अब ईंधन की घरेलू उपलब्धता को लेकर अधिक सतर्क रुख अपना रही है।
दरअसल, रिफाइनरी कंपनियां अक्सर बेहतर मुनाफे के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात को प्राथमिकता देती हैं, खासकर तब जब वैश्विक कीमतें ऊंची हों। ऐसे में देश के भीतर आपूर्ति प्रभावित होने का जोखिम बढ़ जाता है। सरकार ने निर्यात शुल्क बढ़ाकर कंपनियों को घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखने की दिशा में प्रेरित करने का प्रयास किया है, ताकि किसी संभावित कमी की स्थिति से बचा जा सके।
वहीं, पेट्रोल को लेकर फिलहाल सरकार का रुख संतुलित बना हुआ है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल के निर्यात पर कोई अतिरिक्त कर नहीं लगाया गया है और इसकी ड्यूटी शून्य ही रखी गई है। इससे संकेत मिलता है कि पेट्रोल की उपलब्धता को लेकर तत्काल कोई चिंता नहीं है और बाजार में स्थिरता बनी हुई है।
