■ शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और स्वास्थ्य सेवा में सकारात्मक बदलाव की पहल

● मुंबई
महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को हुई मंत्रिमंडल बैठक में राज्य के समग्र विकास को नई दिशा देने वाले कई अहम निर्णय लिए। ‘विकसित महाराष्ट्र 2047’ के दीर्घकालिक विज़न को केंद्र में रखते हुए सरकार ने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक सुधारों की रूपरेखा तय की है।
सरकारी भर्ती प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के माध्यम से होने वाली भर्तियों में संवर्गों की संख्या 53 से बढ़ाकर 153 करने का निर्णय लिया गया है। इस कदम से युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार होगा और चयन प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित बन सकेगी। साथ ही, यूपीएससी की तर्ज पर ‘महाजॉब्स पोर्टल’ के जरिए ‘निपुण सेतु’ पहल शुरू करने की तैयारी है, जिससे भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता और सुगमता आएगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर भी सरकार ने ठोस पहल की है। कुलगांव-बदलापुर क्षेत्र के विकास प्रारूप में संशोधन करते हुए स्टेडियम के लिए आरक्षित भूमि में बदलाव कर 4 एकड़ जमीन टाटा पावर को विद्युत उपकेंद्र स्थापित करने के लिए दी जाएगी। इससे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति को और अधिक मजबूत करने में मदद मिलेगी।
शिक्षा क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुंबई में ‘आईईएस स्किल टेक विश्वविद्यालय’ की स्थापना को मंजूरी दी गई है। यह स्व-वित्तपोषित निजी विश्वविद्यालय युवाओं को उद्योगों के अनुरूप प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए द्वार खोलने में सहायक होगा।
ग्रामीण और तटीय क्षेत्रों के विकास को गति देने के लिए नाबार्ड के ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास फंड के अंतर्गत 61.24 करोड़ रुपये की परियोजना को स्वीकृति दी गई है। इस योजना से विशेष रूप से मछुआरा समुदाय को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़ा निवेश सुनिश्चित किया गया है। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जाइका) के सहयोग से 3,708 करोड़ रुपये की परियोजना के जरिए चिकित्सा शिक्षा, नर्सिंग सेवाओं और स्वास्थ्य तंत्र को सुदृढ़ किया जाएगा।
इन फैसलों से स्पष्ट है कि महाराष्ट्र सरकार राज्य के सर्वांगीण विकास को गति देने के लिए बहुआयामी और दूरदर्शी रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
