
● मुंबई
राज्य के नागरिक अब अपनी वसीयत को सुरक्षित और कानूनी रूप से प्रमाणित कराने के लिए किसी भी उप-पंजीयक कार्यालय में पंजीकरण करा सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार, राज्य के 517 उप-पंजीयक कार्यालयों में मात्र 100 रुपये शुल्क देकर यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है। खास बात यह है कि वसीयत के पंजीकरण के लिए अन्य संपत्ति दस्तावेजों की तरह चार महीने की समय-सीमा लागू नहीं होती। व्यक्ति अपनी इच्छा अनुसार जीवनकाल में कभी भी वसीयत दर्ज करा सकता है।
वसीयत एक कानूनी दस्तावेज होता है, जिसमें व्यक्ति अपनी स्वयं अर्जित चल-अचल संपत्ति या पैतृक संपत्ति में अपने हिस्से के बंटवारे की इच्छा व्यक्त करता है। हालांकि कानूनन वसीयत का पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इससे दस्तावेज की विश्वसनीयता बढ़ती है और भविष्य में उत्तराधिकारियों के बीच विवाद की संभावना कम हो जाती है।
उप महानिरीक्षक (आईटी) अभय मोहिते ने बताया कि जीवनकाल में किसी भी उप-पंजीयक कार्यालय में वसीयत का पंजीकरण कराया जा सकता है और इसके लिए कोई समय-सीमा तय नहीं है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से व्यक्ति की इच्छा का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार हो जाता है।
यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु से पहले वसीयत पंजीकृत नहीं हो पाती, तब भी दस्तावेज में नामित निष्पादक या संबंधित व्यक्ति इसे पंजीकरण के लिए प्रस्तुत कर सकता है। इसके लिए मृत्यु प्रमाणपत्र, हलफनामा, गवाहों के बयान और आवश्यक होने पर न्यायालय आदेश जमा करना होगा।
विभाग ने सीलबंद वसीयत की सुविधा भी शुरू की है, जिसके तहत वसीयत को गोपनीय रूप से जिला पंजीयक कार्यालय में सुरक्षित रखा जा सकेगा।
