
▪️ मुंबई
‘ स्वर संगम फाउंडेशन’ और ‘अनभै’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मासिक व्याख्यानमाला के अंतर्गत शुक्रवार को विरंगुला केंद्र, पूनम सागर, मीरा रोड में वरिष्ठ समाजवादी चिंतक एवं लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रमेश दीक्षित का व्याख्यान आयोजित किया गया। उन्होंने ‘वर्तमान समय की चुनौतियां’ विषय पर विस्तार से अपने विचार रखे।
करीब ढाई घंटे तक चले कार्यक्रम में श्रोताओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। प्रो. दीक्षित ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र ने शुरुआत से ही नागरिकों को समानता, अभिव्यक्ति और असहमति का अधिकार दिया, लेकिन आज नागरिक अधिकार लगातार संकुचित होते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश पुनः नागरिक से प्रजा बनने की स्थिति की ओर बढ़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर चर्चा करते हुए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठाए और कहा कि विश्व में शक्तिशाली देशों का प्रभाव बढ़ने से कई देशों की संप्रभुता प्रभावित हो रही है। गाजा, फिलिस्तीन, ईरान और अन्य संघर्षों का उल्लेख करते हुए उन्होंने वैश्विक मानवाधिकार स्थिति पर भी चिंता जताई।
प्रो. दीक्षित ने उत्तर प्रदेश की वर्तमान परिस्थितियों, लोकतांत्रिक मूल्यों और युवाओं की भूमिका पर भी अपने विचार रखे। प्रश्नोत्तर सत्र में उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह और अहिंसक राजनीति को वर्तमान वैश्विक संकटों के समाधान का महत्वपूर्ण मार्ग बताया।
कार्यक्रम के बाद हुई खुली चर्चा में कवि रमन मिश्र, प्रो. हूबनाथ पांडेय, शैलेश सिंह, पुलक चक्रवर्ती, दिनेश गुप्ता, विष्णु प्रकाश मिश्र, बृजेश सिंह, राकेश शर्मा, प्रतिमा राज, धनंजय, राजीव रोहित, कमलेश शर्मा तथा प्रो. वी. के. दुबे सहित अनेक साहित्यकारों और प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लिया।
अंत में ‘स्वर संगम फाउंडेशन’ के अध्यक्ष हृदयेश मयंक ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
