
▪️बेंगलुरु
सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच भी दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और परिवार के सहयोग से सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। इसका प्रेरणादायक उदाहरण एक ऑटो चालक की बेटी ने प्रस्तुत किया है, जिसने बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (बीपीटी) पाठ्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए तीन स्वर्ण पदक हासिल किए हैं।
राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरजीयूएचएस) के आगामी दीक्षांत समारोह में छात्रा को तीन स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया जाएगा। यह उपलब्धि उसकी शैक्षणिक प्रतिभा, निरंतर परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण का प्रमाण मानी जा रही है।
छात्रा के पिता ऑटो-रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। छात्रा ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के त्याग, शिक्षकों के मार्गदर्शन और कठिन परिस्थितियों में भी लगातार पढ़ाई जारी रखने के संकल्प को दिया है। उसने कहा कि परिवार के प्रोत्साहन और शिक्षकों के सहयोग ने उसे अपने लक्ष्य तक पहुंचने की प्रेरणा दी।
आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद छात्रा ने कभी अपने सपनों से समझौता नहीं किया। उसने पूरी लगन और अनुशासन के साथ अध्ययन किया, जिसका परिणाम आज तीन स्वर्ण पदकों के रूप में सामने आया है।
इस उपलब्धि से न केवल उसका परिवार गौरवान्वित हुआ है, बल्कि यह उन हजारों विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा बन गई है जो संसाधनों की कमी के बावजूद उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य का सपना देखते हैं। छात्रा की सफलता यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि मन में दृढ़ इच्छा, मेहनत और परिवार का साथ हो तो सफलता का शिखर हासिल किया जा सकता है।
