
▪️ नई दिल्ली
कफ सिरप की गुणवत्ता और उसके दुरुपयोग को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नए नियम लागू करते हुए स्पष्ट किया है कि अब खांसी की दवा सहित विभिन्न प्रकार के सिरप बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं बेचे जा सकेंगे। इसके लिए मरीजों को चिकित्सक का वैध प्रिस्क्रिप्शन दिखाना अनिवार्य होगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स नियमों में संशोधन करते हुए Schedule K के तहत मिलने वाली कुछ दवाओं की श्रेणी में बदलाव किया है। नए प्रावधानों के अनुसार सिरप को उन दवाओं की सूची से बाहर कर दिया गया है, जिन्हें बिना पर्चे के खरीदा जा सकता था। यह संशोधन ‘ड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026’ के तहत लागू किया गया है।
सरकार का कहना है कि यह फैसला ओवर-द-काउंटर दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग, मिलावट की घटनाओं और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। नए नियमों के उल्लंघन पर दवा विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बिना लाइसेंस या डॉक्टर की सलाह के सिरप बेचने वाले मेडिकल स्टोरों का लाइसेंस तक रद्द किया जा सकता है।
हाल के महीनों में मध्य प्रदेश और राजस्थान से कफ सिरप के सेवन के बाद बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे। इन घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने दवा गुणवत्ता और बिक्री व्यवस्था की व्यापक समीक्षा शुरू की। इसी क्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्यों को सख्त निगरानी के निर्देश दिए गए।
सरकार ने देशभर में दवा निर्माण इकाइयों और वितरण व्यवस्था की जांच का भी निर्णय लिया है। नियमों के उल्लंघन या गुणवत्ता में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित फैक्ट्रियों के लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने संकेत दिया है कि नए नियमों के प्रभाव की समय-समय पर समीक्षा भी की जाएगी।
