
- नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड के उपयोग की सीमा तय करने से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और भारतीय चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है। याचिका में मांग की गई है कि आधार को केवल पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल किया जाए और इसे नागरिकता, निवास, जन्मतिथि अथवा पते के प्रमाण के रूप में मान्यता न दी जाए।
मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई है, जिसमें आधार के बढ़ते उपयोग और उसकी कानूनी सीमाओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि आधार मूल रूप से पहचान स्थापित करने का माध्यम है, जबकि नागरिकता, स्थायी निवास, जन्मतिथि और पते के प्रमाण के लिए अलग-अलग वैधानिक दस्तावेज निर्धारित हैं। ऐसे में आधार को इन सभी उद्देश्यों के लिए स्वीकार किए जाने से भ्रम और कानूनी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
याचिका में अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि केंद्र और राज्यों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि आधार के उपयोग को उसकी मूल सीमा तक ही रखा जा सके। मामले में चुनाव आयोग की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि विभिन्न सरकारी प्रक्रियाओं और मतदाता संबंधी व्यवस्थाओं में आधार का उपयोग बढ़ा है।
अब इस मामले में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और चुनाव आयोग के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट आगे की सुनवाई करेगा। यह मामला आधार की कानूनी स्थिति और उसके उपयोग के दायरे को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
