
▪️ मुंबई
देश में मानसून की रफ्तार उम्मीद के अनुरूप नहीं चल रही है और मौसम वैज्ञानिक इसके पीछे अलनीनो के बढ़ते प्रभाव को एक प्रमुख कारण मान रहे हैं। केरल में समय पर दस्तक देने के बाद मानसून की गति धीमी पड़ गई है। पश्चिमी भारत में यह पिछले एक सप्ताह से लगभग ठहरा हुआ है, जबकि पूर्वी क्षेत्रों में भी इसका विस्तार अपेक्षाकृत धीमा बना हुआ है।
जून माह में अब तक देशभर में सामान्य से 28 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति अलनीनो के शुरुआती प्रभाव का संकेत हो सकती है। हालांकि फिलहाल इसकी तीव्रता अधिक नहीं है, लेकिन सितंबर तक इसके मजबूत होने की आशंका जताई जा रही है। अलनीनो के दौरान प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिसका असर वैश्विक मौसम प्रणालियों पर पड़ता है और भारत में अक्सर कमजोर मानसून से इसका संबंध देखा जाता है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में फिलहाल कोई मजबूत मौसमी प्रणाली विकसित नहीं हो पाई है। यही वजह है कि मानसून को आगे बढ़ाने वाली परिस्थितियां अनुकूल नहीं बन सकी हैं। स्काइमेट के मौसम वैज्ञानिक जे.पी. शर्मा का कहना है कि अगले सात से दस दिनों तक स्थिति में बड़े सुधार की संभावना कम है। वहीं, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा के अनुसार अरब सागर में लो-लेवल जेट भी पर्याप्त रूप से सक्रिय नहीं है।
महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। महाराष्ट्र में बारिश की कमी 72 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की वास्तविक तस्वीर जुलाई और अगस्त में सामने आएगी। उम्मीद है कि 20 जून के बाद बंगाल की खाड़ी में नई मौसम प्रणाली बनने से मानसून को गति मिलेगी और जुलाई के शुरुआती दिनों में कई क्षेत्रों में अच्छी वर्षा हो सकती है।
