
▪️ मुंबई
डिजिटल युग में साइबर ठगी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं और अब एक खतरनाक तरीका ‘Caller ID Spoofing’ तेजी से लोगों को निशाना बना रहा है। इस तकनीक में ठग कॉलर आईडी को इस तरह बदल देते हैं कि कॉल किसी भरोसेमंद भारतीय नंबर (+91) या बैंक/सरकारी संस्था से आती हुई दिखाई देती है, जबकि असल में कॉल विदेश या किसी फर्जी सर्वर से की जा रही होती है।
- कैसे फंसाते हैं ठग?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ठग पहले एक ऐसा नंबर दिखाते हैं जो बिल्कुल असली लगता है जैसे बैंक, कूरियर कंपनी या सरकारी विभाग का +91 नंबर। इसके बाद वे पीड़ित को डराने या लालच देने वाली बातें करते हैं जैसे-
° आपका बैंक अकाउंट बंद होने वाला है
° KYC अपडेट तुरंत करें
° OTP साझा करें या लिंक पर क्लिक करें
जैसे ही व्यक्ति भरोसा करके OTP, बैंक डिटेल या लिंक शेयर करता है, उसका पूरा बैंक अकाउंट खाली हो सकता है।
- क्यों है यह इतना खतरनाक?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के फ्रॉड में सबसे बड़ा खतरा ‘भरोसा’ है। कॉल स्क्रीन पर दिखने वाला +91 नंबर या बैंक का नाम लोगों को धोखा देता है, जिससे वे बिना जांच-पड़ताल के जानकारी साझा कर देते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि ठग बैंक अधिकारी बनकर OTP मांगते हैं और कुछ ही मिनटों में हजारों से लेकर लाखों रुपये तक की ठगी कर लेते हैं।
- साइबर अपराधियों का नया ट्रेंड
हाल के समय में ऐसे स्कैम और भी उन्नत हो गए हैं, जिनमें AI वॉइस, फर्जी कस्टमर केयर और कॉल मर्जिंग जैसे तरीके भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य केवल एक ही होता है, पीड़ित को भ्रमित करके आर्थिक नुकसान पहुंचाना।
- कैसे रहें सुरक्षित?
° किसी भी अनजान कॉल पर OTP साझा न करें
° बैंक या सरकारी विभाग कभी फोन पर पासवर्ड नहीं मांगते
° संदिग्ध कॉल को तुरंत काट दें और नंबर रिपोर्ट करें
° साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें
Caller ID Spoofing एक ऐसी तकनीक है जो भरोसे को ही हथियार बनाकर लोगों को ठगती है। दिखने में असली लगने वाला +91 नंबर भी फर्जी हो सकता है, इसलिए हर कॉल को जांचना और सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव है।
