▪️सूर्यकांत उपाध्याय

बहुत समय पहले की बात है। दो अरबी दोस्तों को एक बहुत बड़े खजाने का नक्शा मिला। खजाना किसी रेगिस्तान के बीचों-बीच था।
दोनों ने योजना बनानी शुरू की। खजाने तक पहुँचने में बहुत लंबा समय लगता और रास्ते में भूख-प्यास से मर जाने का भी खतरा था। बहुत विचार करने के बाद दोनों ने तय किया कि इस योजना में एक और समझदार दोस्त को शामिल किया जाए, ताकि वे एक अतिरिक्त ऊँट अपने साथ ले जा सकें, जिस पर खाने-पीने का ढेर सारा सामान भी रखा जा सके। यदि खजाना अधिक मिला, तो उसे भी ऊँट पर लादा जा सके।
लेकिन सवाल यह उठा कि चुनाव किसका किया जाए?
बहुत सोचने के बाद गुरु और बबलू को चुना गया। दोनों हर तरह से बिल्कुल एक जैसे थे और यह कहना मुश्किल था कि दोनों में अधिक बुद्धिमान कौन है। इसलिए एक प्रतियोगिता के माध्यम से सही व्यक्ति का चुनाव करने का फैसला किया गया।
दोनों दोस्तों ने उन्हें एक निश्चित स्थान पर बुलाया और कहा, ‘आप दोनों को अपने-अपने ऊँट पर सवार होकर सामने दिखाई दे रहे रास्ते पर आगे बढ़ना है। कुछ दूर जाने के बाद यह रास्ता दो भागों में बँट जाएगा-एक सही और दूसरा गलत। जो व्यक्ति सही रास्ते पर जाएगा, वही हमारा तीसरा साथी बनेगा और खजाने का एक-तिहाई हिस्सा उसका होगा।’
दोनों आगे बढ़े और उस स्थान पर पहुँच गए, जहाँ से रास्ता दो भागों में बँट रहा था।
वहाँ पहुँचकर गुरु ने इधर-उधर देखा। उसे दोनों रास्तों में कोई अंतर समझ नहीं आया, इसलिए वह तुरंत बाईं ओर वाले रास्ते पर बढ़ गया। वहीं बबलू बहुत देर तक दोनों रास्तों को देखता रहा और उनके परिणामों के बारे में सोचता रहा।
करीब एक घंटे बाद बाईं ओर वाले रास्ते पर धूल उड़ती दिखाई दी। गुरु बड़ी तेजी से उसी रास्ते से वापस आ रहा था।
उसे देखते ही बबलू मुस्कुराया और बोला, ‘गलत रास्ता था?’
‘हाँ, शायद।’ गुरु ने उत्तर दिया।
दोनों दोस्त छिपकर यह सब देख रहे थे। वे तुरंत उनके सामने आए और बोले, ‘बधाई हो!’
‘शुक्रिया!’ बबलू ने तुरंत जवाब दिया।
‘तुम्हें नहीं, हमने गुरु को चुना है।’ दोनों दोस्त एक साथ बोले।
‘लेकिन गुरु तो गलत रास्ते पर गया था। फिर उसे क्यों चुना जा रहा है?’ बबलू ने गुस्से में पूछा।
दोनों दोस्तों ने कहा, ‘क्योंकि उसने यह पता लगा लिया कि गलत रास्ता कौन-सा है। अब वह सही रास्ते पर आगे बढ़ सकता है, जबकि तुमने पूरा समय केवल यही सोचने में गँवा दिया कि कौन-सा रास्ता सही है और कौन-सा गलत।’
इतना कहकर दोनों दोस्त गुरु के साथ खजाने की ओर चल दिए और बबलू वहीं बैठा पछताता रह गया।
