
▪️ नासिक
सावन मास के आगमन से ठीक पहले नासिक स्थित प्रसिद्ध त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज हुई है। मंदिर परिसर के अमृतकुंड की सफाई के दौरान एक दुर्लभ एवं प्राचीन शिवलिंग प्राप्त हुआ है। इस खोज को धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह शिवलिंग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा मंदिर परिसर में चल रहे संरक्षण कार्य के दौरान मिला। अमृतकुंड का पानी पूरी तरह निकालकर सफाई की जा रही थी, तभी उसके तल में यह प्राचीन शिवलिंग दिखाई दिया। इसके बाद अधिकारियों ने पूरे क्षेत्र को सुरक्षित कर आगे की जांच और संरक्षण प्रक्रिया शुरू कर दी।
एएसआई के अधिकारियों के अनुसार, यह खोज भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रमाण हो सकती है। शिवलिंग की प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा, ताकि इससे जुड़े तथ्य सामने आ सकें।
त्र्यंबकेश्वर मंदिर का अमृतकुंड लगभग 65 फीट गहरा है। इसका निर्माण पेशवा काल में करीब 200 वर्ष पूर्व कराया गया था। इसी कुंड के पवित्र जल से भगवान त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का अभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं, जिससे इसका विशेष धार्मिक महत्व है।
शिवलिंग मिलने के बाद एहतियात के तौर पर अमृतकुंड क्षेत्र में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है, जबकि पुरातत्व विभाग पूरे क्षेत्र का विस्तृत परीक्षण कर रहा है।
