
▪️नई दिल्ली
भारत के एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहली बार मक्का एथेनॉल उत्पादन का सबसे बड़ा स्रोत बनकर गन्ने से आगे निकल गया है। एथेनॉल सप्लाई वर्ष 2025-26 के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोल में मिलाए जाने वाले कुल एथेनॉल में मक्का की हिस्सेदारी लगभग 36 प्रतिशत पहुंच गई है, जबकि गन्ने का योगदान घटकर करीब 33 प्रतिशत रह गया है। वहीं, अनाज आधारित एथेनॉल की कुल हिस्सेदारी लगभग 67 प्रतिशत हो चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की यह रणनीति केवल गन्ने पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं है। मक्का, टूटे चावल और अन्य खाद्यान्नों से एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से पूरे वर्ष कच्चे माल की उपलब्धता बनी रहती है, जिससे आपूर्ति अधिक स्थिर होती है और देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होती है।
सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल कर लिया है। इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने, विदेशी मुद्रा की बचत करने और किसानों को अतिरिक्त आय उपलब्ध कराने में मदद मिली है। मक्का की बढ़ती मांग से इसके उत्पादक किसानों को भी नए बाजार मिल रहे हैं।
हालांकि, इस बदलाव को लेकर कुछ विशेषज्ञ चिंताएं भी जता रहे हैं। उनका कहना है कि यदि खाद्यान्नों का बड़ा हिस्सा ईंधन उत्पादन में जाने लगे तो भविष्य में खाद्य सुरक्षा, जल संसाधनों और फसल संतुलन पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए एथेनॉल कार्यक्रम का विस्तार करते समय ऊर्जा जरूरतों और कृषि हितों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक होगा।
