▪️ एल नीनो के असर से थमा मानसून

- मुंबई। देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई है। मौसम वैज्ञानिक इसके पीछे प्रशांत महासागर में सक्रिय हो रहे ‘एल नीनो’ प्रभाव को प्रमुख कारण मान रहे हैं। इसके चलते कई राज्यों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की जा रही है, जिससे खरीफ फसलों, जलाशयों और पेयजल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
13 जुलाई 2026 की स्थिति के अनुसार मुंबई सहित महाराष्ट्र के अधिकांश हिस्सों में मानसून फिलहाल कमजोर बना हुआ है। मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ में अगले दो-तीन दिनों तक हल्की बारिश या छिटपुट फुहारों की संभावना है, जबकि लगातार मूसलाधार वर्षा के आसार कम हैं। मराठवाड़ा में बारिश की कमी बनी रह सकती है, जबकि विदर्भ और पश्चिम महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है।

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) और मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 16 से 18 जुलाई के बीच अरब सागर से नमी बढ़ने तथा नई मौसमी प्रणाली बनने के कारण मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो मुंबई, कोंकण और पश्चिमी महाराष्ट्र में फिर से अच्छी बारिश होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर का सतही तापमान बढ़ने से वैश्विक मौसम चक्र प्रभावित होता है। भारत में इसका असर कमजोर मानसून, लंबे शुष्क अंतराल और असमान वर्षा के रूप में दिखाई देता है। इस बार भी अच्छी शुरुआत के बाद मानसून की रफ्तार थमने से कृषि क्षेत्र की चिंता बढ़ गई है।

कम वर्षा का सबसे अधिक असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। धान, सोयाबीन, मक्का और दलहनी फसलों की बुवाई के लिए जुलाई का महीना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि अगले कुछ दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो किसानों की लागत बढ़ने के साथ उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और एल नीनो के संयुक्त प्रभाव से मानसून का स्वरूप लगातार अधिक अनिश्चित होता जा रहा है। ऐसे में जल संरक्षण, बेहतर सिंचाई प्रबंधन और मौसम आधारित कृषि रणनीति अपनाना भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता होगी।
