
▪️ नई दिल्ली
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। मंत्रालय के अनुसार, पासपोर्ट मुख्य रूप से विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक दस्तावेज है और इसका उद्देश्य भारतीय नागरिकों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना है।
मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट जारी करने से पहले आवेदक की पहचान और आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है, लेकिन केवल पासपोर्ट के आधार पर किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता का कानूनी निर्धारण नहीं किया जा सकता। नागरिकता का निर्णय संविधान, नागरिकता अधिनियम, 1955 तथा अन्य प्रासंगिक कानूनों के प्रावधानों के अनुसार होता है।
विदेश मंत्रालय की यह स्पष्टता ऐसे समय में सामने आई है, जब विभिन्न मंचों पर पासपोर्ट को नागरिकता के प्रमाण के रूप में लेकर चर्चा हो रही थी। मंत्रालय ने दोहराया कि पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज (Travel Document) है, जबकि नागरिकता से जुड़े मामलों का निर्धारण संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं और सक्षम प्राधिकारियों द्वारा किया जाता है।
आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल आबादी में अभी भी 8 प्रतिशत से कम भारतीयों के पास पासपोर्ट है। ऐसे में विदेश मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि पासपोर्ट और नागरिकता संबंधी दस्तावेजों के उद्देश्य को अलग-अलग समझें तथा किसी भी भ्रम की स्थिति में केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
