
नई दिल्ली। ‘विश्व निशाने पर है’ (Planet is on Target- VNPH) जलवायु संकट जागरूकता अभियान के तत्वावधान में कारगिल विजय दिवस और विश्व मैंग्रोव दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष वैश्विक कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्र सेवा और मानवता का संदेश दिया गया। वॉइस ऑफ वीएनपीएच पर प्रसारित इस कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज़ सोशल सर्विस विंग, माउंट आबू के अंतरराष्ट्रीय वक्ता एवं आध्यात्मिक प्रशिक्षक बीके ई. वी. गिरीश ने पहली बार सार्वजनिक रूप से 21 से 25 अगस्त तक भारत और नेपाल में आयोजित होने वाले ‘राष्ट्रव्यापी विश्व बंधुत्व रक्तदान अभियान’ की घोषणा की।
बीके ई. वी. गिरीश ने कहा कि सच्चा विश्व बंधुत्व केवल विचारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मानव जीवन बचाने वाली निःस्वार्थ सेवा के रूप में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने रक्तदान को मानवता की सर्वोच्च सेवा बताते हुए सभी नागरिकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की। उन्होंने बताया कि ब्रह्माकुमारीज़ सोशल सर्विस विंग, माउंट आबू की ओर से भारत एवं नेपाल के प्रत्येक निकटतम ब्रह्माकुमारीज़ सेवा केंद्र पर यह रक्तदान अभियान आयोजित किया जाएगा। यह अभियान विश्व बंधुत्व दिवस के उपलक्ष्य में तथा ब्रह्माकुमारीज़ की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी प्रकाशमणि जी की पावन स्मृति को समर्पित रहेगा।
वर्ष 2004 में स्थापित ‘विश्व निशाने पर है’ (VNPH) जलवायु संकट जागरूकता अभियान के इस विशेष कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु-सचेत जीवनशैली को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में देश के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, रक्षा विशेषज्ञ, शिक्षाविद, पर्यावरणविद और आध्यात्मिक नेतृत्व एक मंच पर आए और समाज को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर एयर मार्शल रवि कपूर, लेफ्टिनेंट जनरल शोकिन चौहान, वाइस एडमिरल पुनीत कुमार बहल, एयर मार्शल जी. एस. बेदी, लेफ्टिनेंट कर्नल कैलाश बंसल, लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज कुमार सिन्हा (सेवानिवृत्त), लेफ्टिनेंट कर्नल निशा जोशी, कर्नल बी. वेंकट, कवि मनोज ‘भावुक’ तथा अभियान के संस्थापक डॉ. निखिल कांत ने अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने जलवायु-सचेत जीवनशैली अपनाने, पर्यावरण संरक्षण को व्यक्तिगत जिम्मेदारी बनाने और इसे जन-आंदोलन का स्वरूप देने की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं ने अपने-अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि छोटे-छोटे व्यक्तिगत प्रयास भी जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम का समापन ‘पोएटिक क्लाइमेटोलॉजी’ की विशेष प्रस्तुति के साथ हुआ। इस प्रस्तुति के माध्यम से रचनात्मक अभिव्यक्ति, आध्यात्मिक चेतना और सकारात्मक व्यक्तिगत आचरण के जरिए जलवायु-अनुकूल जीवनशैली अपनाने का प्रेरक संदेश दिया गया। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि रक्तदान, पर्यावरण संरक्षण और विश्व बंधुत्व जैसे अभियानों के माध्यम से समाज में सेवा, संवेदनशीलता और वैश्विक एकता की भावना को और अधिक मजबूत किया जा सकेगा।
