
▪️नई दिल्ली।
केंद्र सरकार देशभर के करोड़ों बीएस-6 (BS-6) वाहन मालिकों को राहत देने की तैयारी में है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है। इसका उद्देश्य नए और कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के लिए अनुपालन का बोझ कम करना, जबकि पुराने वाहनों की नियमित जांच के जरिए प्रदूषण नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाना है।
प्रस्ताव के अनुसार, छह वर्ष तक पुराने BS-6 निजी वाहनों के लिए PUC प्रमाणपत्र की वैधता मौजूदा एक वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष की जा सकती है। छह से दस वर्ष पुराने वाहनों के लिए हर वर्ष एक बार और दस वर्ष से अधिक पुराने वाहनों के लिए प्रत्येक छह महीने में प्रदूषण जांच अनिवार्य रहेगी। सरकार का मानना है कि नवीनतम उत्सर्जन मानकों वाले BS-6 वाहन अपेक्षाकृत कम प्रदूषण फैलाते हैं, इसलिए उनके लिए बार-बार जांच की आवश्यकता नहीं है।
सरकार PUC प्रणाली को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके तहत डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन निगरानी और जांच केंद्रों की जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही फर्जी PUC प्रमाणपत्र जारी करने और जांच में अनियमितताओं पर सख्ती बरती जाएगी, ताकि प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था अधिक विश्वसनीय बन सके।
प्रस्ताव पर विभिन्न राज्यों और संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जा रहे हैं। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद नए नियम पूरे देश में लागू किए जाएंगे। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो लाखों BS-6 वाहन मालिकों को बार-बार PUC प्रमाणपत्र बनवाने की झंझट से राहत मिलेगी, जबकि पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर निगरानी पहले की तरह जारी रहेगी। सरकार का मानना है कि इससे पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों की सुविधा, दोनों उद्देश्यों के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकेगा।
