▪️ पुस्तक समीक्षा@राजेश विक्रांत

• हिंदी और भोजपुरी के सुप्रसिद्ध कवि, ग़ज़लकार, गीतकार तथा कथाकार लाल बहादुर चौरसिया ‘लाल’ की पुस्तक ‘चुभे लागल बरगद के छांव’ एक उत्कृष्ट भोजपुरी गीत-संग्रह है। इस पुस्तक में कुल 99 गीत संकलित हैं। इनमें प्रकृति, रीति-रिवाज, परंपरा, पर्यावरण, प्रेम, रिश्ते, परिश्रम, शिक्षा, मौसम, भक्ति, श्रृंगार, संयोग-वियोग, भाषा और जन्मभूमि जैसे विविध विषयों को अत्यंत सहज और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
लाल बहादुर चौरसिया ‘लाल’ भोजपुरी और हिंदी के प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं। इससे पहले उनके दो काव्य-संग्रह ‘आंसू से मुस्कान लिखेंगे’ तथा ‘मैं मधुमास ढूंढने आया’ प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी रचनाएं आईसीएसई और सीबीएसई बोर्ड की हिंदी पाठ्यपुस्तकों की ‘मैथिली’ और ‘बांसुरी’ श्रृंखला में भी शामिल हैं।
‘चुभे लागल बरगद के छांव’ का चयन तथागत पांडुलिपि प्रकाशन योजना-2026 के अंतर्गत हुआ है। इसके प्रकाशक भोजपुरी प्रकाशन, नई दिल्ली हैं। 126 पृष्ठों की इस पुस्तक का मूल्य 210 रुपए है। संग्रह का प्रत्येक गीत अपनी अलग पहचान रखता है। कवि ने अपनी गेय रचनाओं के माध्यम से भोजपुरी माटी की सोंधी सुगंध और लोकजीवन की संवेदनाओं को जीवंत किया है।
उनका एक गीत ‘लाल कहाइब’ देखिए-
गड़ही, पोखरा, ताल कहाइब, काहे घटी बेहाल कहाइब।
समय के साथे जूझत बाटी, कहियो माला-माल कहाइब।
मत देखा ई जेठ लगल हौ, सावन में भौकाल कहाइब।
इसी प्रकार ‘डोले पूरबी बयार’ में फागुन और प्रकृति का मोहक चित्र उभरकर सामने आता है-
डोले पूरबी बयार, फागुन के मस्त महिनवाँ में।
सरसो के फुलवन से महकल सिवनवाँ, चनवाँ फुलायल त चहकल गगनवाँ…
इस संग्रह की अनेक रचनाएं विशेष रूप से प्रभावित करती हैं। इनमें ‘काहे हिंदी के बिसरावल जाला’, ‘पसीना’, ‘का हो बेटा घोंचू लाल’, ‘नेह बांटत रहा’, ‘नयके साल में’, ‘ओरहन’, ‘निहोरा’, ‘भोजपुरी कवि सम्मेलन’, ‘एगो चंदा बा उतरल’, ‘फिर परधानी आइल बा’, ‘केहू नईखे बोलत बा’, ‘गंध केसर झरे’, ‘कठिन काम बा’, ‘पछतावा’, ‘मोरा गांव’, ‘कर जोरि के’, ‘झंडा लहरे’, ‘सूनी सेजरिया ना’, ‘सजली संवरिया’, ‘बोला मितवा’, ‘बगिया सजइबे’, ‘भइली निहाल’, ‘सब कुछ लुटाइल’, ‘ना कउनो संनेस आइल’, ‘कांपे ले बदनियां’, ‘आजमगढ़ की भुंइया’, ‘मत बेंचा घरवा-दुआर’ तथा ‘दू गो ललनवां’ उल्लेखनीय हैं।
समग्र रूप से ‘चुभे लागल बरगद के छांव’ भोजपुरी लोकजीवन, संस्कृति, संवेदना और भाषा की मिठास से सराबोर एक पठनीय गीत-संग्रह है, जिसे भोजपुरी साहित्य के पाठकों द्वारा अवश्य पढ़ा जाना चाहिए।
