▪️ जानिए कैसे तैयार होती है पवित्र भस्म?

- उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की विश्वप्रसिद्ध भस्म आरती अपनी अनूठी परंपरा और आध्यात्मिक महत्व के लिए जानी जाती है। हर दिन ब्रह्ममुहूर्त में होने वाली इस आरती में भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार पवित्र भस्म से किया जाता है। हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि इस भस्म को तैयार करने की प्रक्रिया भी उतनी ही विशेष और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है।
वर्तमान समय में आरती में प्रयुक्त भस्म श्मशान की चिता से नहीं, बल्कि गोबर के कंडों से तैयार की जाती है। पहले चयनित गोबर के कंडों को पूरी तरह जलाकर उनकी राख एकत्र की जाती है। इसके बाद इस राख को महीन कपड़े से कई बार छाना जाता है, ताकि उसमें किसी प्रकार का कण या अशुद्धि न रहे। फिर इसमें पारंपरिक विधि से सुगंधित और पवित्र सामग्री मिलाई जाती है, जिससे यह आरती के योग्य बनती है।
तैयार भस्म को सूती कपड़े की पोटली में भरकर गर्भगृह में ले जाया जाता है। जल, दूध, दही, शहद और अन्य पूजन सामग्रियों से अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का इसी भस्म से श्रृंगार किया जाता है। वैदिक मंत्रोच्चार, डमरू और घंटियों की ध्वनि के बीच संपन्न होने वाली यह आरती भक्तों को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति कराती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म जीवन की नश्वरता और आत्मा की अमरता का प्रतीक है। भगवान शिव को भस्म प्रिय मानी जाती है, इसलिए महाकाल की यह आरती देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बनी हुई है। प्रतिदिन हजारों भक्त इस दिव्य अनुष्ठान के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।
