- हैदराबाद में खाद्य सुरक्षा एजेंसियों ने मसालों में मिलावट करने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। छापेमारी में लौंग, सौंफ, सरसों समेत कई मसाले रासायनिक रंगों, सिंथेटिक कलर और टैल्कम पाउडर से मिलावटी पाए गए। इस कार्रवाई ने एक बार फिर उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की जरूरत का एहसास कराया है।

हैदराबाद पुलिस की फूड एडल्टरेशन सर्विलांस टीम (H-FAST) और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने संयुक्त अभियान चलाकर 25 टन से अधिक संदिग्ध और मिलावटी मसाले जब्त किए। जांच में सामने आया कि कुछ कारोबारी मसालों को अधिक आकर्षक दिखाने के लिए उनमें रासायनिक रंग, सिंथेटिक कलर और टैल्कम पाउडर जैसी हानिकारक सामग्री मिला रहे थे। इस मामले में कई प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मिलावटी मसालों का लंबे समय तक सेवन करने से एलर्जी, पेट संबंधी समस्याएं, लीवर और किडनी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए मसाले खरीदते समय केवल कीमत नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
▪️घर पर ऐसे करें मिलावटी मसालों की पहचान
- सौंफ: एक गिलास पानी में सौंफ डालें। यदि पानी का रंग हरा या पीला होने लगे, तो उस पर कृत्रिम रंग चढ़ाया गया हो सकता है।
- लौंग: लौंग को सफेद कपड़े या टिश्यू पर रगड़ें। यदि रंग उतरने लगे या हाथ पर दाग छोड़ दे, तो उसमें कृत्रिम रंग होने की आशंका है।
- हल्दी पाउडर: पानी में हल्दी डालने पर यदि तुरंत गहरा रंग फैल जाए या नीचे सफेद अवशेष दिखाई दें, तो उसमें मिलावट हो सकती है।
- लाल मिर्च पाउडर: पानी में डालने पर यदि रंग तेजी से घुल जाए या ऊपर चमकीली लाल परत तैरने लगे, तो उसमें सिंथेटिक रंग मिलाया गया हो सकता है।
- धनिया पाउडर: हथेली पर रगड़ने पर यदि असामान्य चमक दिखे या रंग छोड़ने लगे, तो उसकी शुद्धता संदिग्ध हो सकती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मसाले हमेशा विश्वसनीय ब्रांड या प्रमाणित विक्रेता से ही खरीदें। बहुत अधिक चमकीले रंग, असामान्य खुशबू या बेहद कम कीमत वाले मसालों से सावधान रहें। यदि किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट की आशंका हो तो उसकी शिकायत स्थानीय खाद्य सुरक्षा विभाग या संबंधित हेल्पलाइन पर करें। जागरूक उपभोक्ता ही मिलावट के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच बन सकते हैं।
- नोट: घर पर किए जाने वाले ये परीक्षण केवल प्रारंभिक संकेत देते हैं। किसी मसाले के मिलावटी होने की अंतिम पुष्टि केवल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की जांच से ही की जा सकती है।
