▪️ पुस्तक समीक्षा @राजेश विक्रांत

भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त कमांडर मनोज चौधरी द्वारा लिखित ‘मरीन ड्राइव मुंबई का दिल’ की शुरुआत इन पंक्तियों से होती है- ‘आओ चलो… भावनाओं के सागर में एक डुबकी लगाएं, मन की आंखों से मरीन ड्राइव पर चलो घूम आएं।’ इन पंक्तियों से ही महसूस होता है कि लेखक ने किस जज्बे और उत्साह से इस पुस्तक का सृजन किया है। यह पुस्तक इतिहास, भावनाओं और लेखक की दूरदर्शी सोच का अप्रतिम संगम है।
यह पुस्तक 126 साल पुराने मरीन ड्राइव, जिसे मुंबई का मियामी कहा जाता है, पर केंद्रित एक भावनात्मक, काव्यात्मक और कथात्मक रचना है। इसमें रिपोर्ताज, कविताओं और कहानियों के माध्यम से मरीन ड्राइव के इतिहास और वर्तमान के विभिन्न पहलुओं को समेटा गया है।
कमांडर मनोज चौधरी मूल रूप से कवि हैं। यह उनकी प्रकाशित होने वाली छठी पुस्तक है। इससे पूर्व प्रकाशित उनके कविता और कहानी संग्रहों को पाठकों के हर वर्ग से भरपूर सराहना और स्नेह प्राप्त हुआ है।
‘मरीन ड्राइव मुंबई का दिल’ 29 अध्यायों में विभाजित है। इनमें एक परिचय, मुंबई और मरीन ड्राइव का इतिहास, चरैवेति, गहमागहमी, मुस्कुराता जीवन, जीवन की आपाधापी में सुकून के पल, भौंरे की गुनगुन, रिश्तों की सुबह, ऐतिहासिक कल: गौरवान्वित आज, किनारे की मुस्कान, मुंबई पुलिस का योगदान, ढलती सांझ, सांस्कृतिक समागम, चांदनी रातें, खट्टी-मीठी बातें, बरसातें, सुलझती गुत्थी, प्राणवायु, सेना का भरोसा, ख्वाब अधूरे: कैसे हों पूरे- मरीन ड्राइव का विस्तार, मेरा नजरिया, गिरगांव चौपाटी, सफाई कर्मचारी, यातायात की बेहतर सुविधा, प्रवासी जीवन, विरासत, जनसैलाब, इंद्रधनुष का आठवां रंग, हवाई जहाज की पहली उड़ान और आतंक के साए पर ओंबले की जीत जैसे अध्याय शामिल हैं।
पुस्तक की भूमिका में शिक्षाविद डॉ. दयानंद तिवारी ने बिल्कुल सही लिखा है कि मुंबई सपनों का शहर, संघर्षों का संगम और अनगिनत कहानियों की जीवित धड़कन है। इस महानगर की आत्मा को यदि किसी एक स्थान पर महसूस करना हो, तो वह है मरीन ड्राइव। यह केवल समुद्र तट नहीं, बल्कि संवेदनाओं, स्मृतियों, संघर्षों और सपनों का विराट विस्तार है। प्रस्तुत पुस्तक ‘मरीन ड्राइव: मुंबई का दिल’ इसी जीवंत धड़कन का अत्यंत भावपूर्ण और ऐतिहासिक दस्तावेज है, जिसे कमांडर मनोज चौधरी ने अपने अनुभव, संवेदना और गहन अध्ययन के आधार पर रचा है।
‘मुंबई और मरीन ड्राइव का इतिहास’ अध्याय में लेखक ने सात द्वीपों से महानगर तक की यात्रा, प्राचीन साम्राज्यों और बंदरगाहों का विकास, मध्यकालीन सत्ता परिवर्तन, पुर्तगाली और अंग्रेजी दौर की शुरुआत, कोली समुदाय और मरीन ड्राइव की भूमि, बैक बे रिक्लेमेशन और मरीन ड्राइव का जन्म, असंभव से संभव तक तथा पूर्णता की ओर जैसे उपशीर्षकों के तहत इतिहास के पन्नों को खंगाला है।
इसके तहत ‘इतिहास का मौन साधक’ डॉ. इलियास मोजेस के बारे में जानकारी दी गई है। वे पेशे से डॉक्टर थे, लेकिन सोच से दूरदर्शी इंजीनियर थे। उन्हीं के सुझावों पर मरीन ड्राइव का सपना साकार हुआ, जो आज केवल एक सैरगाह नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच है, जहां जीवन हर दिन नया अनुभव करता है।
लेखक कमांडर मनोज चौधरी के भीतर मुंबई के प्रति एक विशेष आत्मीयता है, जिसे पुस्तक के हर पन्ने पर महसूस किया जा सकता है। इसमें मरीन ड्राइव के सौंदर्य के साथ-साथ इतिहास, पीड़ा, संघर्ष, करुणा और साहस को कहानियों और कविताओं के जरिए अभिव्यक्त किया गया है।
पुस्तक में तीन कहानियां हैं- ‘मुस्कुराता जीवन’, ‘रिश्तों की सुबह’ तथा ‘खट्टी-मीठी बातें’। वहीं ‘भौंरे की गुनगुन’, ‘रिश्तों की सुबह’, ‘किनारे की मुस्कान’, ‘मुंबई पुलिस का योगदान’, ‘चांदनी रातें’, ‘खट्टी-मीठी बातें’, ‘बरसातें’, ‘सुलझती गुत्थी’, ‘गिरगांव चौपाटी’ और ‘इंद्रधनुष का आठवां रंग’ के साथ सबसे मार्मिक कविता ‘आतंक के साए पर ओंबले की जीत’ नामक अध्याय में है।
‘मरीन ड्राइव मुंबई का दिल’ का सबसे महत्वपूर्ण लेख ‘ख्वाब अधूरे: कैसे हों पूरे’ है। इसके तहत मरीन ड्राइव के विस्तार को लेकर लेखक ने अपना नजरिया प्रस्तुत किया है।
इस पुस्तक को आरके पब्लिकेशन, मुंबई ने प्रकाशित किया है। पुस्तक की पृष्ठ संख्या 160 है और पेपरबैक संस्करण का मूल्य 595 रुपए है।
