- मुंबईकर हो रहे ‘माइंडलेस ईटिंग’ के शिकार

▪️मुंबई । मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी में वडापाव और मोबाइल फोन दोनों रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। लोकल ट्रेन में सफर हो या ऑफिस की व्यस्तता, कई लोग एक हाथ में वडापाव और दूसरे में मोबाइल लेकर इंस्टाग्राम रील्स देखते हुए खाना पसंद करते हैं। यह आदत भले ही सामान्य नजर आए, लेकिन विशेषज्ञ इसे ‘माइंडलेस ईटिंग’ यानी बिना ध्यान दिए खाने की आदत से जोड़ रहे हैं।
रील्स देखते समय दिमाग का अधिकांश ध्यान स्क्रीन पर चल रहे लगातार बदलते वीडियो पर रहता है। ऐसे में व्यक्ति को यह महसूस ही नहीं होता कि उसने कितना खाना खा लिया है। भोजन के स्वाद, खुशबू और मात्रा पर ध्यान कम होने से जरूरत से ज्यादा खाने की संभावना बढ़ सकती है। यही वजह है कि मोबाइल देखते हुए खाना खाने की आदत को अब स्वास्थ्य के लिहाज से भी गंभीरता से देखा जा रहा है।
- रील्स का आकर्षण, खाने से ध्यान भटका रहा
इंस्टाग्राम रील्स में कुछ ही सेकंड में नया वीडियो सामने आ जाता है। लगातार बदलते दृश्य और मनोरंजक सामग्री दिमाग को व्यस्त रखते हैं। इसका असर यह होता है कि भोजन करते समय व्यक्ति का ध्यान खाने के बजाय मोबाइल स्क्रीन पर ज्यादा रहता है। वह जल्दी-जल्दी खा सकता है और पेट भरने के संकेतों को भी नजरअंदाज कर सकता है।
- वड़ा-पाव के साथ बढ़ सकती है परेशानी
मुंबई में वडापाव, समोसा, पावभाजी और अन्य फास्ट फूड आसानी से उपलब्ध हैं। ऐसे भोजन को खाते समय यदि व्यक्ति मोबाइल में व्यस्त रहे तो खाने की मात्रा पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो सकता है। जल्दबाजी में भोजन करने से एसिडिटी, पेट फूलने और अपच जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।
- भोजन के समय मोबाइल से दूरी जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, ‘माइंडफुल ईटिंग’ यानी भोजन करते समय केवल खाने पर ध्यान देना एक बेहतर आदत है। मोबाइल को कुछ देर के लिए दूर रखना, भोजन को धीरे-धीरे चबाना और स्वाद पर ध्यान देना व्यक्ति को अपनी भूख और पेट भरने के संकेतों को समझने में मदद कर सकता है।
मुंबई की तेज रफ्तार जिंदगी में कुछ मिनट बचाने के लिए रील्स देखते हुए खाना आसान विकल्प लग सकता है, लेकिन भोजन को भी उतना ही समय और ध्यान देना जरूरी है। अगली बार वडापाव हाथ में हो तो रील्स के बजाय उसके स्वाद पर ध्यान देना शायद ज्यादा फायदेमंद साबित हो।
