▪️सूर्यकांत उपाध्याय

एक दिन एक प्रोफेसर कक्षा में आए और बोले, ‘चलिए, सरप्राइज टेस्ट के लिए तैयार हो जाइए।’ सभी विद्यार्थी घबरा गए। कुछ किताबों के पन्ने पलटने लगे तो कुछ प्रोफेसर द्वारा दिए गए नोट्स जल्दी-जल्दी पढ़ने लगे।
पेपर बांटे गए। प्रोफेसर ने कहा, ‘अब आप पेपर देख सकते हैं।’ विद्यार्थियों ने प्रश्नपत्र देखा तो हैरान रह गए। उसमें एक भी प्रश्न नहीं था। पूरे सफेद पन्ने पर केवल एक काला बिंदु बना था।
एक छात्र ने पूछा, ‘सर, इसमें तो कोई प्रश्न ही नहीं है।’ प्रोफेसर बोले, ‘जो कुछ आपके सामने है, आपको केवल उसी की व्याख्या करनी है। आपके पास 10 मिनट हैं। शुरू कीजिए।’
विद्यार्थियों ने लिखना शुरू किया। समय समाप्त होने पर प्रोफेसर ने सभी उत्तर पढ़े। लगभग सभी ने उस काले बिंदु की अलग-अलग व्याख्या की थी, लेकिन किसी ने भी उसके चारों ओर मौजूद सफेद हिस्से का उल्लेख नहीं किया।
प्रोफेसर ने कहा, ‘इस परीक्षा का आपकी पढ़ाई से कोई संबंध नहीं है और इसके कोई अंक भी नहीं मिलेंगे। इसका उद्देश्य आपको जीवन की एक सच्चाई समझाना है। पूरे कागज का 99 प्रतिशत हिस्सा सफेद है, लेकिन आप सभी ने अपना पूरा ध्यान उस एक प्रतिशत काले बिंदु पर लगा दिया। यही हमारे जीवन में भी होता है।’
हमारी समस्याएं जीवन का केवल एक छोटा हिस्सा होती हैं, लेकिन हम अपना अधिकांश समय उन्हीं के बारे में सोचते रहते हैं। कोई अपने रूप को लेकर चिंतित है, कोई करियर को लेकर और कोई पैसों की कमी को लेकर।
हम अपने जीवन की उन 99 प्रतिशत खुशियों को क्यों भूल जाते हैं? परिवार, स्वास्थ्य, भोजन, मित्र और जीवन में मिली छोटी-छोटी खुशियों के लिए आभार क्यों नहीं जताते?
