▪️सूर्यकांत उपाध्याय

एयर कमोडोर विशाल जेट पायलट थे। एक युद्ध मिशन के दौरान उनका लड़ाकू विमान मिसाइल की चपेट में आकर नष्ट हो गया। हालाँकि, उन्होंने समय रहते खुद को विमान से बाहर निकाल लिया और पैराशूट की मदद से सुरक्षित धरती पर उतर गए। इस साहस के लिए उन्हें कई लोगों से प्रशंसा और सराहना मिली।
घटना के पाँच वर्ष बाद एक दिन वह अपनी पत्नी के साथ एक रेस्टोरेंट में बैठे थे। तभी पास की मेज से एक व्यक्ति उनके पास आया और बोला, ‘आप कैप्टन विशाल हैं न? आप जेट फाइटर उड़ाते हैं? एक बार आपका लड़ाकू विमान मिसाइल से नष्ट हो गया था, है न?’
विशाल ने आश्चर्य से पूछा, ‘तुम्हें यह सब कैसे पता?’
उस व्यक्ति ने मुस्कुराकर कहा, ‘उस दिन मैंने ही आपका पैराशूट पैक किया था।’
यह सुनकर विशाल कुछ क्षणों के लिए स्तब्ध रह गए। उन्होंने सोचा कि यदि उस दिन वह पैराशूट ठीक से काम नहीं करता, तो शायद वे आज यहाँ नहीं होते। यह विचार आते ही उनका हृदय कृतज्ञता से भर गया।
उस रात विशाल ठीक से सो नहीं सके। वे सोचते रहे कि उन्होंने उस व्यक्ति को कितनी बार देखा होगा, लेकिन कभी उसका हालचाल पूछने या उससे बात करने की जरूरत महसूस नहीं की। शायद इसलिए कि वे एक फाइटर पायलट थे और वह व्यक्ति एक साधारण कर्मचारी था।
तो दोस्तों, हमारा पैराशूट कौन पैक कर रहा है?
हमारे जीवन में अनेक लोग ऐसे होते हैं, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हमारी सुरक्षा, सुविधा और खुशियों में योगदान देते हैं। जीवन को सुरक्षित और सुखद बनाने के लिए हमें शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक-हर तरह के ‘पैराशूट’ की आवश्यकता होती है।
हम अक्सर रोजमर्रा की भागदौड़ में उन लोगों को धन्यवाद देना भूल जाते हैं, जो हमारे लिए अपना काम पूरी ईमानदारी से करते हैं। घर से कचरा लेने आने वाला कर्मचारी, रोज सफाई करने वाली महिला, सोसाइटी का सुरक्षा गार्ड, बस चालक या कंडक्टर-ये सभी किसी न किसी रूप में हमारे जीवन का पैराशूट हैं।
आइए, उन सभी लोगों के प्रति कृतज्ञ हों, जिन्होंने किसी न किसी रूप में हमारे ‘पैराशूट’ को सुरक्षित रखा है। उन्हें धन्यवाद दें, सम्मान दें और कभी-कभी बिना किसी स्वार्थ के उनके लिए कुछ अच्छा भी करें।
