▪️मुंबई
मुंबई में बदलती जीवनशैली, तनाव, अनियमित खानपान और कामकाज के दबाव के कारण युवाओं में ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, कोविड महामारी के बाद कम उम्र के लोगों में स्ट्रोक के मामलों में अनुमानित 10 से 95 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।

परेल स्थित ग्लेनईगल्स अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नितिन डांगे ने बताया कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, धूम्रपान, शराब और मानसिक तनाव इसके प्रमुख जोखिम कारक हैं। भारत में पांच प्रतिशत से भी कम मरीज गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंच पाते हैं। इस्केमिक स्ट्रोक में साढ़े चार घंटे के भीतर उपचार बेहद महत्वपूर्ण है।
डॉ. शिरीष एम. हस्तक और डॉ. संगीता रावत ने ‘बीई फास्ट’ के जरिए लक्षण पहचानने की सलाह दी। इसमें संतुलन बिगड़ना, दृष्टि प्रभावित होना, चेहरा टेढ़ा होना, हाथ कमजोर पड़ना और बोलने में परेशानी शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखते ही तत्काल अस्पताल पहुंचना चाहिए। समय पर उपचार से जान और स्थायी दिव्यांगता, दोनों का खतरा कम किया जा सकता है।
