◆ स्वदेशी तकनीक को सरकार का समर्थन

● नई दिल्ली। भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी ज़ोहो की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। स्वदेशी होने के कारण केंद्र सरकार भी इसे प्रोत्साहन दे रही है। अब प्रधानमंत्री कार्यालय सहित लगभग 12 लाख केंद्रीय कर्मचारियों के ईमेल पते ज़ोहो ऑफिस सूट पर स्थानांतरित कर दिए गए हैं। पहले ये ईमेल सेवाएँ राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सर्वर पर संचालित होती थीं।
सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों का डेटा सुरक्षित रखना और उसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म पर संचालित करना है। कंपनी के एक अधिकारी ने ‘द हिंदू’ को बताया कि पहले सरकारी कर्मचारी अलग-अलग ओपन सोर्स एप्लिकेशनों का उपयोग करते थे, जिससे डेटा सुरक्षा को खतरा रहता था। अब सभी को जोहो के एकीकृत ऑफिस सूट का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।

क्या है जोहो?
साल 2005 में अमेरिका में स्थापित जोहो कॉर्पोरेशन ने 2009 में अपना मुख्यालय भारत में स्थानांतरित किया। यह क्लाउड आधारित ऑल-इन-वन टूल्स प्रदान करती है जिनमें जोहो मेल, जोहो शीट, जोहो शो और जोहो प्रोजेक्ट्स जैसी सेवाएँ शामिल हैं। इसे माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस या गूगल वर्कस्पेस का भारतीय संस्करण कहा जा सकता है।
कंपनी का दावा है कि वह उपयोगकर्ताओं के डेटा को न तो एक्सेस करती है और न ही बेचती है। इसी कारण सरकार ने स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इसे अपनाया है। 3 अक्तूबर को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा, “भारत सरकार सर्विस इकोनॉमी से प्रोडक्ट आधारित इकोसिस्टम की ओर बढ़ना चाहती है। ज़ोहो जैसे स्वदेशी उत्पादों को अपनाना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में साहसिक कदम है, जो डिजिटल संप्रभुता और डेटा सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा।”
ईमेल डोमेन nic.in या gov.in यथावत रहेगा, केवल उसका डेटा होस्टिंग अब जोहो के सर्वर पर होगी।
