- “अनाधिकारी को यदि अधिकार प्राप्त हो जाता है तो वह उत्पाती हो जाता है”

● विदिशा।
मध्यप्रदेश के विदिशा जिले स्थित गंज बासौदा के श्रीधाम बासौदा दरबार में “आओ गायें रामकथा घर घर में” इस आध्यात्मिक आंदोलन के प्रणेता पूज्य प्रेमभूषण महाराज के व्यासत्व में 25 नवम्बर से 3 दिसंबर तक नित्य दोपहर 1 से 4 बजे के सत्र में आयोजित 9 दिवसीय रामकथा में प्रेमभूषण महाराज ने श्रीसीताराम विवाह पंचमी की मंगल बधाई देते हुए कहा कि जीवन का व्यवहार पहले मन में उत्पन्न होता है, तभी जगत में अवतरित होता है।
उन्होंने कहा कि जिस परिवार की पाँच पीढ़ियों का बोध हो, वही परिवार श्रेष्ठ कहलाता है। जीवन परंपराओं से बंधा है, इसीलिए विवाह में शाखोच्चार के समय दस पीढ़ियों का उल्लेख होता है। जीवन में निष्ठा से ही प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।
मानस के व्यवहार घाट के लोकप्रिय वक्ता प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि श्रेष्ठ के आसन, बासन, अनुशासन और सिंहासन के प्रयोग से स्वयं को बचाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अनाधिकारी को यदि अधिकार प्राप्त हो जाता है तो वह उत्पाती हो जाता है। आरक्षण से आने वाले अधिकारी इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।

प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि संत, मंत्र, ग्रंथ और श्रेष्ठ में श्रद्धा रखनी चाहिए क्योंकि श्रद्धा ही फलदायी होती है। मन को मुखिया नहीं बनाना चाहिए। रामकथा का माहात्म्य समझाते हुए उन्होंने कहा कि लोककल्याण करने वाली पावन रामकथा गंगा जिसके भी जीवन में अवतरित हो जाती है, उसका जीवन धन्य हो जाता है। किंतु अशांत चित्त से भक्ति और भजन संभव नही है। भगवान का भजन करने वाले को भगवान इच्छित फल अवश्य प्रदान करते हैं।
मानस के नामकरण संस्कार प्रसंग पर बोलते हुए महाराज ने कहा कि मनुष्य का नाम माता-पिता और सद्गुरु द्वारा रखा जाता है। नाम तीन प्रकार के होते हैं — राशि नाम, पुकार नाम और संस्कार नाम। तीसरा नाम हमारे आचार-विचार और व्यवहार के आधार पर इष्टमित्र, स्नेही-स्वजनों और समाज से प्राप्त होता है। बालक का नाम मौसा-मौसी या अन्य रिश्तेदारों को न देकर गुरु एवं योग्य आचार्य से ही रखवाना चाहिए।

कथा के मध्य में प्रेमभूषण महाराज ने “अंगनैया में रघुवर खेला करें”, “सरजू के तीर आज खेलैं रघुनंदन बबुआ”, “रामकथा गंगा सुगम बही जाये”, “जय जय रामकथा” जैसे कई लोकप्रिय भजनों के माध्यम से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
अधिवक्ता राजेश शर्मा के संकल्प से आयोजित इस रामकथा महोत्सव में भारी संख्या में श्रोताओं ने उपस्थिति दर्ज की। महंत महेश्वर त्यागी, पूर्व विधायक निषंग जयंत, पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश तिवारी, विधायक हरिसिंह रघुवंशी, अधिवक्ता अरविंद तिवारी, अमान सिंह राजपूत, भाजपा नेता, पंडित राघव प्रिया तथा वरिष्ठ पत्रकार यशपाल यादव सहित कई गणमान्य जनों ने कथा श्रवण का लाभ प्राप्त किया।
