
● नई दिल्ली
दुनिया में कई ऐसे छोटे देश हैं जहां परंपरागत अर्थों में जेलें मौजूद ही नहीं हैं। आबादी कम होने, अपराध दर बेहद न्यून होने और न्याय व्यवस्था के सरल ढांचे के कारण इन देशों ने जेल प्रणाली के बजाय वैकल्पिक मॉडल अपनाए हैं। ऐसे देशों में अपराध होने पर आरोपियों को अस्थायी हिरासत में रखा जाता है या फिर लंबी सजा के मामले में उन्हें पड़ोसी देशों को सौंप दिया जाता है।
वेटिकन सिटी दुनिया का सबसे छोटा राष्ट्र है और यहां किसी प्रकार की स्थायी जेल नहीं है। केवल कुछ होल्डिंग सेल हैं, जहां आरोपियों को अस्थायी रूप से रखा जाता है। किसी गंभीर अपराध में दोषी पाए जाने पर उन्हें इटली की न्याय प्रणाली के तहत सजा दिलाई जाती है।
इसी तरह लिखटेनस्ताइन में भी स्थायी जेल व्यवस्था नहीं है। यूरोप का यह छोटा देश गंभीर अपराध के मामलों में अपने दोषियों को स्विट्जरलैंड या ऑस्ट्रिया की जेलों में भेजता है। वहां के न्यायिक समझौते इस प्रक्रिया को सुगम बनाते हैं।
इन देशों की खासियत यह है कि अपराध दर बहुत कम है और आबादी इतनी सीमित कि एक पूर्ण कारागार प्रणाली चलाना आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं माना जाता। नतीजतन, यह मॉडल न केवल प्रशासनिक रूप से हल्का है बल्कि न्यायिक सहयोग के अंतरराष्ट्रीय ढांचे पर आधारित है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवस्था उन देशों के लिए उपयुक्त है जिनका आकार छोटा है और जहां अपराध के मामले विरले ही सामने आते हैं। ऐसे उदाहरण बताते हैं कि न्याय व्यवस्था जेलों पर ही आधारित हो, यह जरूरी नहीं। छोटे देशों ने सहयोग और संयम के साथ वैकल्पिक मॉडल भी सफलतापूर्वक अपनाए हैं।
