
● नई दिल्ली।
चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर एक “अत्यंत सक्रिय और गतिशील” विद्युत वातावरण का खुलासा किया है, जो पहले की वैज्ञानिक उम्मीदों से कहीं अधिक जटिल साबित हो रहा है। यह निष्कर्ष लैंडर पर स्थापित RAMBHA-LP (रेडियो एनाटॉमी ऑफ द मून बाउंड हाइपरसेंसिटिव आयनोस्फियर एंड एटमॉस्फियर – लैंगमुइर प्रोब) से मिला है।
दक्षिणी ध्रुव पर पहला प्लाज्मा मापन
इसरो के अनुसार यह पहली बार है जब चंद्रमा के दक्षिणी उच्च अक्षांशों में सतह के इतना करीब प्लाज्मा का प्रत्यक्ष मापन किया गया। ‘शिव शक्ति बिंदु’ के पास इलेक्ट्रॉन घनत्व 380 से 600 कण प्रति घन सेंटीमीटर के बीच पाया गया, जो पुराने उपग्रह-आधारित अनुमानों से काफी अधिक है।

सौर हवाओं से बना गतिशील विद्युत वातावरण
इसरो ने बताया कि सूर्य से आने वाली सौर हवाएँ लगातार चंद्रमा की सतह पर टकराती हैं। इनके साथ मैग्नेटोटेल से जमा होने वाले कण मिलकर एक निरंतर बदलता हुआ विद्युत क्षेत्र बनाते हैं। मापे गए इलेक्ट्रॉन अत्यधिक ऊर्जावान पाए गए, जिनका तापमान 3,000 से 8,000 केल्विन के बीच था।
प्लाज्मा निर्माण की मुख्य वजह
सूर्य के ऊपरी वायुमंडल से निकली आवेशित कणों की धारा सौर पवन चंद्र सतह से टकराकर प्लाज्मा बनाती है। प्रकाशविद्युत प्रभाव के साथ मिलकर यही प्रक्रिया इस क्षेत्र में मौजूद ऊर्जावान प्लाज्मा का प्रमुख कारण बनती है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर यह नई जानकारी भविष्य के लैंडर मिशनों और सतह-आधारित वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
