■ सूर्यकांत उपाध्याय

महाभारत के महानायक भीम को भोजन बेहद प्रिय था। महाभारत की यह कहानी कौरव और पांडव के बचपन की है, जब सभी भाई-बहन एक साथ रहते थे। लेकिन भोजन के समय भीम सबसे अधिक भोजन करते थे। इस बात को लेकर दुर्योधन और उनके भाई नाराज रहते थे क्योंकि भीम अक्सर उनका हिस्सा भी खा जाते थे।
एक दिन दुर्योधन ने चुपके से भीम के भोजन में जहर मिलाया और उन्हें अपने साथ नदी किनारे घुमाने ले गए। जब भीम मूर्छित हो गए तो उन्हें नदी में फेंक दिया। नदी में एक नाग रहता था जिसने औषधि से उनका इलाज किया और उन्हें स्वस्थ कर पुनः नदी किनारे छोड़ दिया।
भीम अपने घर यानी हस्तिनापुर के राजमहल लौटे। जब भीम वापस आए तो हस्तिनापुर में शोक सभा चल रही थी। सबको यह लग रहा था कि भीम मर चुके हैं। उनके लिए उसी दिन श्राद्ध का आयोजन भी किया गया।
भीम महल में पहुंचे और वहां कई तरह की कटे हुए सब्जियां और फल देखे। उन्होंने इन सभी सब्जियों और फलों को मिलाकर एक व्यंजन बनाया। वर्तमान में तमिल लोग ‘अवियल’ नामक व्यंजन बनाते हैं और इसके आविष्कार का श्रेय भीम को ही जाता है।
इसी तरह, अज्ञातवास के दौरान भीम राजा विराट के यहां बावर्ची का कार्य करते थे। वह खाना बनाते और परोसते थे, लेकिन स्वयं केवल सभी के खाने के बाद ही भोजन कर सकते थे। उनके लिए यह एक तरह का दंड था, क्योंकि वे जीवन भर दूसरों के हिस्से का भोजन किया करते थे।
अंततः भीम के जीवन के अंतिम समय में, जब वे स्वर्गारोहण के लिए अपनी माता और भाइयों के साथ जा रहे थे, तो वे बर्फीली चट्टान से गिर पड़े। दूसरों के हिस्से का भोजन करने के कारण उन्हें नर्क भी मिल सकता था, लेकिन उन्होंने जीवन में कई अच्छे और कल्याणकारी कार्य किए थे, इसलिए उन्हें स्वर्ग में स्थान मिला।
