● नवी मुंबई में शिवमहापुराण कथा आरंभ
● ‘सेव हिंदू सनातन यात्रा’ में हजारों हुए शामिल

खारघर ।
सुप्रसिद्ध कथावाचक श्री देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने कहा है कि विश्व में जब कहीं मानवता पर संकट आता है तब सनातनी सबके साथ खड़े होते हैं। आज बांग्लादेश में जब सनातनी हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं तब सारे विश्व को उसके विरोध में खड़ा होना चाहिए। महाराज ने समस्त देशवासियों और विशेषकर महाराष्ट्रवासियों से अपील की वे यह प्रण लें कि वे बांग्लादेशियों को काम नहीं देंगे। उन्होंने मांग की कि बांग्लादेशियों को उनके देश वापस भेज दिया जाए। महाराज के पावन मुखारविंद से यहां नवी मुंबई के खारघर में पेठपाडा मेट्रो स्टेशन के समीप कॉरपोरेट पार्क ग्राउंड पर श्री शिवमहापुराण कथा बुधवार को आरंभ हुई। इससे पहले पूज्य देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज के नेतृत्व में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे कथित अत्याचारों के विरुद्ध जन-जागरण हेतु ‘सेव हिंदू सनातन यात्रा’ निकाली गई। इसमें हज़ारों श्रद्धालु शामिल हुए। हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर, उन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से एकस्वर में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। ‘बांग्लादेश में धर्म के आधार पर हिंसा बंद हो ‘, ‘हिंदुओं की रक्षा हो’ जैसे नारे लगाए गए।
इस अवसर पर पूज्य ठाकुरजी महाराज ने कहा कि बांग्लादेश में रह रहे हिंदुओं को वहां की सरकार पूर्ण सुरक्षा प्रदान करे और मानवाधिकारों का उल्लंघन तत्काल रोका जाए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस विषय में हस्तक्षेप करने की अपील की। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महाराजश्री ने कहा कि अब चुप रहने का समय नहीं है, बल्कि न्याय के लिए संगठित होकर आवाज उठाने का समय है। उन्होंने सनातन समाज को एकजुट होकर धर्म व मानवता की रक्षा करने की प्रेरणा दी।

‘वीर बाल दिवस मनाएं‘
महाराज ने कहा कि सेनातनियों को क्रिसमस की बजाए गुरु गोविंद सिंह के बच्चों के बलिदान के दिन को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुगलों के तमाम अत्याचारों के बावजूद गुरु गोविंद सिंह ने सनातन को नहीं छोड़ा। इसीलिए वे अमर हैं। उनकी वीरता और बलिदान को सनातनी कभी नहीं भूलेंगे।
शिव के रूप अनेक
भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए महाराज ने कहा कि शिव एक ही हैं लेकिन उनके रूप अनेक हैं। हम जितने भी पूजा-पाठ, दर्शन करते हैं, कथाएं सुनते हैं वह सब शिव का ही रूप है।
उन्होंने पाप से बचने की सीख दी। उन्होंने कहा कि पाप को छिपाना नहीं चाहिए उसे प्रकट करना चाहिए। पुण्य प्रकट नहीं करना चाहिए। जो प्रकट होगा वह कम हो जाएगा। इसी तरह जो मनुष्य सत्य बोलता है भगवान उसे छोड़कर कभी नहीं जाते हैं। झूठ बोलने वाला अपने पाप की सीमा को बहुत बढ़ा लेता है। धनवान लोग बहुत झूठ बोलते हैं इसीलिए उनका मन शांत नहीं रहता है। ईंट, पत्थर, मकान को सुख नहीं कहते हैं। वेद भी कहते हैं सत्य बोलिए, प्रिय बोलिए।
