- वैश्विक ट्रैफिक का चौथाई हिस्सा अकेले देश से

■ आत्मन मिश्र | मुंबई
भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, दिशा तय करने वाला देश बनता जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में जिस तेजी से भारतीय समाज ने स्वीकार्यता दिखाई है, उसने अमेरिका और यूरोप जैसे पारंपरिक टेक हब को भी चौंका दिया है। बोफा सिक्योरिटीज की ताजा रिपोर्ट इसी बदलाव की तस्दीक करती है, जिसमें भारत को दुनिया का सबसे बड़ा एआई यूजर मार्केट बताया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक चैटजीपीटी भारत में एआई की दुनिया का निर्विवाद नेता बनकर उभरा है। इसके भारतीय मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या करीब 14.5 करोड़ तक पहुंच चुकी है, जो कुल एआई उपयोग का लगभग 38 प्रतिशत है। यह आंकड़ा केवल लोकप्रियता नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि एआई अब भारतीयों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।
दूसरे पायदान पर गूगल जेमिनी है, जिसके लगभग 10.5 करोड़ भारतीय यूज़र हैं और बाजार हिस्सेदारी करीब 28 प्रतिशत मानी जा रही है। गूगल के मजबूत डिजिटल नेटवर्क और भारतीय भाषाओं के बेहतर सपोर्ट ने इसे युवाओं और कामकाजी वर्ग के बीच खास पहचान दिलाई है।
वहीं, तीसरे स्थान पर परप्लेक्सिटी एआई है। भले ही इसके भारतीय यूज़र लगभग दो करोड़ हों, लेकिन चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इसके वैश्विक ट्रैफिक का करीब 38 प्रतिशत अकेले भारत से आता है।
इसके अलावा कैनवा एआई और डीपसीक जैसे प्लेटफॉर्म भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। कैनवा एआई के वैश्विक स्तर पर 1.1 अरब से अधिक विजिट्स, जबकि डीपसीक के यूजर आंकड़े 647 मिलियन तक पहुंच चुके हैं। यह रुझान बताता है कि भारत में एआई का उपयोग केवल चैट तक सीमित नहीं, बल्कि डिजाइन, प्रेजेंटेशन, कोडिंग और डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में भी गहराई से हो रहा है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि भारत के करीब 50 प्रतिशत इंटरनेट उपयोगकर्ता किसी न किसी रूप में एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। खासकर 25 से 44 वर्ष आयु वर्ग के 84 प्रतिशत लोग पढ़ाई, कंटेंट क्रिएशन, प्रोग्रामिंग और दफ्तर के कामों में एआई को सक्रिय रूप से अपना चुके हैं। हिंदी सहित भारतीय भाषाओं में उपलब्धता, मुफ्त या किफायती फीचर्स और तेज प्रतिक्रिया समय इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई ने भारत में उत्पादकता की सोच ही बदल दी है। छात्र कम समय में बेहतर तैयारी कर रहे हैं, प्रोफेशनल्स अधिक सटीक और प्रभावी ढंग से काम कर पा रहे हैं और स्टार्टअप्स सीमित संसाधनों में बड़े प्रयोग कर रहे हैं। यही वजह है कि आज वैश्विक एआई विजिट्स का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा भारत के नाम है।
आने वाले समय में मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, युवा आबादी और भाषाई विविधता के सहारे भारत एआई इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बनने की ओर तेजी से बढ़ता दिख रहा है। यह उभार केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव भी है।

बहुत बढ़िया आत्मन बेटा। लिखते रहो