
● मुंबई
साइबर ठगी पर नियंत्रण के लिए व्हॉट्सऐप भारत में हर महीने लाखों संदिग्ध कॉन्टैक्ट्स को ब्लॉक कर रही है। इनमें वे अकाउंट शामिल हैं जो फ्रॉड गतिविधियों में लिप्त पाए जाते हैं या प्लेटफॉर्म की गाइडलाइंस का उल्लंघन करते हैं। कंपनी अपनी मासिक कंप्लायंस रिपोर्ट के माध्यम से इस कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करती है, जिससे पारदर्शिता तो बढ़ती है, पर ठगों को पूरी तरह रोक पाना अब भी चुनौती बना हुआ है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार केवल व्हॉट्सऐप तक सीमित कार्रवाई से स्कैमर्स दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हो जाते हैं। इसी खामी को दूर करने के लिए सरकार अब बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत व्हॉट्सऐप पर प्रतिबंधित किए गए नंबरों को सरकार के साथ साझा किया जाएगा, ताकि उन्हें सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एकसाथ ब्लॉक किया जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकतर साइबर ठग मैसेजिंग ऐप्स के जरिए लोगों को निशाना बनाते हैं। एक बार अकाउंट बनने के बाद उसे बिना सक्रिय सिम कार्ड के भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे ठगों की पहचान और ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने ‘सिम बाइंडिंग’ को अनिवार्य कर दिया है।
इस नियम के लागू होने के बाद बिना सक्रिय सिम कार्ड के व्हॉट्सऐप, टेलीग्राम, स्नैपचैट जैसे किसी भी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग संभव नहीं होगा। सरकार का मानना है कि इस समन्वित व्यवस्था से साइबर ठगी पर प्रभावी अंकुश लगेगा और डिजिटल सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।
