
● कल्याण
राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” की 150वीं जयंती के अवसर पर अचिवर्स कॉलेज, कल्याण एवं नरेंद्र पवार फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य कवि सम्मेलन एवं सांस्कृतिक समारोह का आयोजन अत्यंत उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन ने राष्ट्रभक्ति, साहित्य और सांस्कृतिक चेतना का अनुपम संगम प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व विधायक नरेंद्र पवार रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विजय नारायण पंडित एवं अचिवर्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. महेश भिवंडीकर की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को और बढ़ाया। दीप प्रज्वलन एवं “वंदे मातरम्” के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
कवि सम्मेलन में देश के प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी ओजस्वी एवं प्रभावशाली रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। विशेष रूप से वीर रस के प्रख्यात कवि योगेंद्र शर्मा (भीलवाड़ा) की ओजस्वी, देशभक्ति से परिपूर्ण कविता ने देश और भारतीय सेना के शौर्य, बलिदान एवं पराक्रम को शब्दों में जीवंत करते हुए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति पर सभागार बार-बार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

इसके पश्चात अंतरराष्ट्रीय हास्य कवि महेश दुबे (मुंबई) ने अपनी धारदार एवं रोचक रचनाओं से श्रोताओं को ठहाकों से भर दिया। वहीं कवि अनिल मिश्रा, हास्य कवि योगेश मिश्रा, हास्य कवि ● श्याम अचल तथा राष्ट्रीय कवि संगम की अध्यक्षा श्रीमती रीमा सिंह ने भी अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
इस भव्य आयोजन का संपूर्ण संयोजन, आयोजन एवं प्रबंधन राजेश यादव (RJ Events) के नेतृत्व में अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उनके कुशल आयोजन, सशक्त मंच संचालन एवं समयबद्ध व्यवस्था की उपस्थित अतिथियों एवं श्रोताओं द्वारा भूरी-भूरी प्रशंसा की गई।
कार्यक्रम को सफल बनाने में NSS कार्यक्रम अधिकारी ज्योतिका मोटवानी एवं हर्षल सूर्यवंशी के साथ-साथ डॉ. अमित धर्माधिकारी, डॉ. कल्याणी विष्णु पिंगले, एस. के. श्रीवास्तव तथा अनिल कुमार राही (राष्ट्रीय अध्यक्ष, नवकुंभ साहित्य सेवा संस्थान) का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, छात्र-छात्राएँ एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत यह आयोजन न केवल साहित्यिक दृष्टि से अत्यंत सफल रहा, बल्कि युवा पीढ़ी में देशप्रेम की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम का समापन “वंदे मातरम्” के सामूहिक उद्घोष के साथ हुआ।
