
● मुंबई
भारतीय किसानों की अथक मेहनत ने देश को एक और ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंचा दिया है। चावल उत्पादन के क्षेत्र में भारत ने दुनिया में पहला स्थान हासिल कर लिया है। अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने इसे भारत की खाद्य आत्मनिर्भरता, किसान-संकल्प और राष्ट्रीय स्वाभिमान की बड़ी उपलब्धि बताया है।
शंकर ठक्कर के अनुसार, नए साल की शुरुआत भारत के लिए गौरवपूर्ण समाचार लेकर आई है। लंबे समय तक चावल उत्पादन में अग्रणी रहे चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत अब वैश्विक स्तर पर नंबर-1 बन गया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, यह देश के अन्नदाताओं की तपस्या और खेतों में बहाए गए पसीने का प्रतिफल है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वयं इस ऐतिहासिक सफलता की जानकारी साझा की है।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि भारत ने कठिन दौर देखे हैं। 1960 के दशक में देश को अकाल और सूखे का सामना करना पड़ा था। तब भारत को अपनी जरूरतों के लिए विदेशों से अनाज मंगाना पड़ता था। उस समय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देशवासियों से सप्ताह में एक दिन उपवास रखने की अपील की थी। आज वही भारत दुनिया के कुल चावल उत्पादन का 28 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले अपने खेतों में उगा रहा है।
शंकर ठक्कर ने कहा कि जब जलवायु परिवर्तन के कारण कई देश खाद्य संकट और भुखमरी की आशंका से जूझ रहे हैं, तब भारतीय किसानों की यह उपलब्धि पूरे विश्व के लिए आशा और प्रेरणा का संदेश है। यह सफलता मजबूत कृषि नीतियों, वैज्ञानिक तकनीक और किसानों के समर्पण का परिणाम है।
अंत में उन्होंने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और देश के समस्त किसानों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि भारत का खेत आज न केवल देश का पेट भर रहा है, बल्कि दुनिया में भी अपनी क्षमता का परचम लहरा रहा है।
