
● मुंबई
गोरेगाँव पश्चिम के बांगुर नगर स्थित लक्ष्मी–सरस्वती ग्राउंड में पूज्य राजन जी महाराज के व्यासत्व में, चंद्रकांत गुप्ता एवं चमेली देवी गुप्ता के पावन संकल्प से तथा रामकथा सेवा समिति मुंबई के तत्वावधान में 11 जनवरी तक आयोजित नौ दिवसीय रामकथा महोत्सव में गंगा महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
व्यासपीठ से श्रोताओं की अपार भीड़ को संबोधित करते हुए पूज्य राजन महाराज ने कहा कि जिस भूमि पर गंगा बहती है, वह भारत भूमि धन्य है। तीर्थराज प्रयाग में याज्ञवल्क्य–भरद्वाज संवाद के माध्यम से रामकथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में अर्थ के साथ-साथ परम अर्थ भी आवश्यक है, और वह है भगवत नाम। भगवान शिव की भक्ति के बिना भगवान राम की भक्ति को पाना कठिन है। यही कारण है कि याज्ञवल्क्य जी ने भारद्वाज जी को रामकथा सुनाने से पूर्व भगवान शिव की कथा का श्रवण कराया।
पूज्य राजन महाराज ने कहा कि आज तक कोई भी पर्वतारोही कैलाश पर चढ़ नहीं पाया है, किंतु मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों में दिखाई देने वाली डेढ़-डेढ़ सौ फ़ुट ऊँची आकृतियाँ इस बात का प्रमाण देती हैं कि कैलाश पर आज भी भगवान शिव का निवास है। उन्होंने मानस सूत्र देते हुए कहा कि अपनी वर्तमान स्थिति को स्वीकार करने से जीवन में सहजता आती है, अन्यथा जीवन में मिलावट और गिरावट सुनिश्चित हो जाती है।
कैलाश पर माता पार्वती के प्रश्नों और भगवान शिव के उत्तरों से अवतरित रामकथा का गायन करते हुए पूज्य राजन महाराज ने कहा कि ध्यान की शक्ति से संसार छूट जाता है। लोकमंगल की कामना से माता पार्वती ने भगवान शंकर से रामकथा सुनने की इच्छा प्रकट की। रामकथा गंगा को मन-मानस में बसा लेने से जीवन के सभी विकार समाप्त हो जाते हैं। भगवान के सगुण और निर्गुण रूप में कोई भेद नहीं है। निर्गुण भगवान भक्त की भावना के अनुसार स्वरूप धारण कर प्रकट होते हैं। भक्त को कुत्ते में भी भगवान दिखाई देते हैं और अभक्त को मंदिर में भी भगवान दिखाई नहीं देते। जिनके हृदय में प्रेम की तड़प होती है, उनसे भगवान आज भी मिलते हैं।

रामकथा को विस्तार देते हुए पूज्य राजन महाराज ने कहा कि भगवान शिव, भगवान राम के नाम से ही काशी में जीवों को मुक्ति प्रदान करते हैं। धर्म की कभी हानि नहीं होती, क्योंकि राम स्वयं धर्म हैं। धर्म और अधर्म की तुलना में अधर्म बड़ा दिखाई दे सकता है, पर उसका वास्तविक अस्तित्व नहीं होता। उन्होंने भगवान के अवतार के कारणों का भी सविस्तार वर्णन किया।
राम जन्म प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्या में चक्रवर्ती दशरथ जी की पुत्र-प्राप्ति की कामना, गुरु वशिष्ठ के संकल्प और आशीर्वाद से, श्रृंगी ऋषि द्वारा संपन्न पुत्रकामेष्टि यज्ञ के माध्यम से पूर्ण हुई और अयोध्या में भगवान राम का प्राकट्य हुआ।
“आओ गायें रामकथा घर-घर में” आध्यात्मिक आंदोलन के प्रणेता प्रेममूर्ति पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज के कृपापात्र पूज्य राजन महाराज ने अपने वैशिष्ट्यपूर्ण शैली में कथा प्रसंगों के बीच
“जिस देश की डाली-डाली पर सोने की चिड़िया करती बसेरा”,
“रामकथा गंगा सुगम बही जाए”,
“है कण-कण में झाँकी भगवान की”,
“त्रिभुवन विदित अवध जेकर नउवां”,
“सब देव चले महादेव चले”,
“जनम लिहले रघुरैया, अवध आज बाजे बधइयां”,
“सज गई सगरी बजरिया हो, रस-रस डोले हो बयरिया”
जैसे राष्ट्रगीत, भजन और पारंपरिक मंगल गीतों की प्रस्तुति अपने संगीत सारथी विनय भैया के साथ देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
