■ 394 के प्रस्ताव निरस्त

● भोपाल
गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद कैदियों को लेकर सरकार का बड़ा निर्णय सामने आया है। जेल विभाग ने राज्य सरकार को भेजे गए समय-पूर्व रिहाई के प्रस्तावों की गहन समीक्षा के बाद 481 मामलों में से केवल 87 बंदियों को रिहा करने की स्वीकृति दी है, जबकि 394 बंदियों के प्रस्ताव अपात्र पाए जाने पर निरस्त कर दिए गए हैं। इससे कई कैदियों को इस बार आज़ादी का इंतज़ार और लंबा करना पड़ेगा।
जेल विभाग के अनुसार, जिन 87 बंदियों को राहत दी गई है, उनका चयन अच्छे आचरण, जेल मैन्युअल की पात्रता शर्तों और सजा की अवधि के संतोषजनक निर्वहन के आधार पर किया गया है। विभाग का स्पष्ट कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह विधिक प्रावधानों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप लिया गया है।
● 7 महिला आजीवन कारावास बंदी भी शामिल
जारी आदेश में बताया गया है कि यह निर्णय दंड प्रक्रिया संहिता 1973 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की संबंधित धाराओं के तहत लिया गया है। रिहा होने वालों की सूची में 7 महिला आजीवन कारावास बंदी भी शामिल हैं, जिन्हें विशेष शर्तों के साथ रिहाई दी जाएगी। हालांकि, जिन बंदियों की अपील उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, उन्हें फिलहाल इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा। इसी तरह जिन कैदियों ने जुर्माने की राशि जमा नहीं की है, उन्हें जुर्माना अदा करने तक जेल में ही रहना होगा। अन्य राज्यों में लंबित मामलों वाले बंदियों को संबंधित राज्य की जेलों में भेजा जाएगा।
● भोपाल सर्कल से सर्वाधिक रिहाई
सर्कलवार आंकड़ों पर नज़र डालें तो भोपाल सर्कल से सबसे अधिक 11 बंदियों को रिहाई दी जा रही है। रीवा से 10, ग्वालियर, जबलपुर, सागर और इंदौर सर्कल से 9-9 बंदियों को आज़ादी मिलेगी। नरसिंहपुर और बड़वानी से 6-6, उज्जैन से 5 और नर्मदापुरम से 3 बंदियों को रिहा किया जाएगा। अलीराजपुर जिला जेल से एक और इंदौर की खुली जेल से दो बंदी भी रिहाई सूची में शामिल हैं।
जेल विभाग ने दो टूक कहा है कि यह लाभ केवल उन्हीं कैदियों को दिया गया है, जिन्होंने सजा की लंबी अवधि अनुशासन और गरिमा के साथ पूरी की है और जो समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार माने गए हैं।
