
● मुंबई
मकर संक्रांति का पर्व पूरे राज्य में उल्लास और परंपरागत उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। ‘तिलगुड़ लो, मीठा-मीठा बोलो’ के संदेश के साथ लोगों ने आपसी स्नेह और सौहार्द को साझा किया। सुबह से ही मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। कामकाजी दिन होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने देवदर्शन के साथ दिन की शुरुआत की।
पुणे के प्रसिद्ध श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर में मकर संक्रांति के अवसर पर विशेष रौनक दिखाई दे रही है। नववर्ष 2026 के पहले प्रमुख पर्व पर अपने आराध्य गणराय को तिलगुड़ का नैवेद्य अर्पित कर आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर भक्ति, आस्था और उत्साह से सराबोर नजर आया। मकर संक्रांति को वर्ष का पहला आत्मीयता और स्नेह का पर्व माना जाता है, इसी भावना के साथ भक्तजन गणपति बाप्पा के चरणों में नतमस्तक हुए।
मकर संक्रांति का सांस्कृतिक रंग भी पूरे राज्य में दिखाई दिया। काले वस्त्र पहनकर महिलाओं ने तिल की बर्फी, तिलगुड़ और हलवा एक-दूसरे को भेंट किया। घर-घर में गुड़ की पूरियां बनीं और आसमान में रंग-बिरंगे पतंगों ने पर्व की खुशियों को और भी जीवंत कर दिया।
उधर, मराठवाड़ा के प्रसिद्ध श्री तुलजाभवानी मंदिर में भी मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। देवी के दर्शन और आरती के लिए तुलजापुर शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाएं मंदिर पहुंचीं। इसी बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने एक अहम निर्णय लिया है। मकर संक्रांति के दिन ओवाळणी के लिए आने वाली महिलाओं के लिए आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। आधार कार्ड के बिना मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इसके साथ ही भीड़ प्रबंधन के तहत आज शाम 5 से 6 बजे के बीच पुरुषों के मंदिर प्रवेश पर अस्थायी रोक लगाई गई है। इस अवधि में केवल महिला श्रद्धालुओं को ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति होगी। मंदिर प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुव्यवस्थित दर्शन सुनिश्चित करने के लिए की गई है।
