■ क्या ट्रम्प की धमकी के बाद रुकी फांसी

● नई दिल्ली
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच 26 वर्षीय इरफ़ान सुल्तानी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता उभर आई है। तेहरान के पश्चिम स्थित फ़र्दिस शहर से गिरफ़्तार किए गए सुल्तानी को कथित तौर पर मौत की सज़ा सुनाए जाने की सूचना सामने आई, हालांकि ईरानी न्यायपालिका ने बाद में इस दावे से इनकार किया। इसके बावजूद मानवाधिकार संगठनों और परिवार का कहना है कि उनकी जान अभी भी खतरे में है।
नॉर्वे स्थित कुर्द मानवाधिकार संगठन ‘हेंगॉ’ के अनुसार, सुल्तानी को पिछले गुरुवार को उनके घर से गिरफ़्तार किया गया था। कुछ ही दिनों बाद अधिकारियों ने परिवार को बताया कि बुधवार को फांसी दी जा सकती है, पर आरोपों या प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई। रिश्तेदारों का दावा है कि अदालत ने महज दो दिनों में सज़ा का फ़ैसला सुना दिया।
इरफ़ान सुल्तानी कराज के फ़र्दिस इलाके में कपड़ों की दुकान चलाते हैं। परिवार को बताया गया कि वे विरोध प्रदर्शनों से जुड़े थे। उनकी बहन, जो पेशे से वकील हैं, ने मामले में हस्तक्षेप की कोशिश की, पर अधिकारियों ने आगे कोई रास्ता न होने की बात कही।
हेंगॉ के प्रतिनिधि अवियर शेखी के मुताबिक, इस दौर में ईरानी सरकार पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज़ी से हिंसक दमन कर रही है। इंटरनेट बंद होने के कारण ऐसे मामलों की स्वतंत्र पुष्टि कठिन हो गई है, जिससे सुल्तानी जैसे कई मामलों की जानकारी सामने नहीं आ पा रही।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गई तो अमेरिका कड़े कदम उठाएगा। उन्होंने ईरानियों से विरोध जारी रखने की अपील की, साथ ही यह भी कहा कि ताज़ा सूचनाओं के अनुसार फांसी की योजनाएं फिलहाल रोकी गई हैं।
तेहरान समेत कई शहरों में इंटरनेट बंदी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सीमित पहुंच ने ईरान की जमीनी हकीकत को और धुंधला कर दिया है। ऐसे में इरफ़ान सुल्तानी का मामला ईरान में अभिव्यक्ति की कीमत पर उठते बड़े सवालों का प्रतीक बन गया है।
