
● नई दिल्ली
योग गुरु स्वामी रामदेव ने बढ़ते पर्यावरणीय रोगों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि वायु, जल और खाद्य पदार्थों में बढ़ता दूषण सीधे मानव स्वास्थ्य को संकट में डाल रहा है। उनका कहना है कि रसायनों और कृत्रिम उत्पादों पर अत्यधिक निर्भरता ने जीवन को असंतुलित बना दिया है, जिसका दुष्प्रभाव अब शरीर के साथ-साथ प्रकृति पर भी स्पष्ट दिखाई देने लगा है। दीर्घकाल में रासायनिक पदार्थों का उपयोग पूरे इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचा रहा है।
- स्वदेशी और समग्र जीवन पद्धति पर जोर
पतंजलि के माध्यम से पारंपरिक भारतीय प्रणालियों को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि मधुमेह, मोटापा और उच्च रक्तचाप जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को आत्म-अनुशासन और नियमित शारीरिक सक्रियता से रोका जा सकता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि स्थायी स्वास्थ्य लाभ के लिए आयुर्वेद, योग और नैतिक मूल्यों को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए।
