● भेदभाव की परिभाषा को लेकर याचिका पर सुनवाई को मंजूरी

● नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा अधिसूचित यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) रेगुलेशन, 2026 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दे दी है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि नए नियमों में जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा को सीमित और गैर-समावेशी रखा गया है, जिससे कुछ वर्ग संस्थागत संरक्षण से बाहर हो सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने तत्काल सुनवाई की मांग पर दलीलें सुनीं। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि यूजीसी के नए प्रावधानों के चलते सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव की आशंका पैदा होती है। मामला ‘राहुल दीवान एवं अन्य बनाम भारत सरकार’ के रूप में दायर किया गया है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि अदालत स्थिति से अवगत है और यदि नियमों में खामियां हैं तो उनका निराकरण जरूरी है। पीठ ने संकेत दिया कि याचिका को विधिवत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
याचिका में यह भी कहा गया है कि नए रेगुलेशन में जाति-आधारित भेदभाव को केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग तक सीमित कर दिया गया है, जिससे अन्य श्रेणियां संरक्षण के दायरे से बाहर रह जाती हैं। इसी मुद्दे को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने विरोध दर्ज कराया है और नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग उठाई है।
उल्लेखनीय है कि यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन, 2026 को 13 जनवरी को अधिसूचित किया गया था और यह देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों पर लागू है। नियमों का घोषित उद्देश्य धर्म, नस्ल, लिंग, जन्म स्थान, जाति और विकलांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करना बताया गया है।
