
● वसई
‘आओ गायें रामकथा घर-घर में’ आध्यात्मिक आंदोलन की देश-विदेश तक अलख जगाने वाले, मानस के सिद्ध साधक एवं व्यवहार-घाट के ओजस्वी प्रवक्ता, क्रांतिकारी संत प्रेममूर्ति पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज के व्यासत्व में सुप्रसिद्ध समाजसेवक बिजेन्द्र रामचंद्र सिंह द्वारा 1 मार्च तक वसंत नगरी ग्राउंड, वसई पूर्व में आयोजित नौ दिवसीय मानस महाकुंभ में रामकथा गंगा प्रवाहित की जा रही है।
कथा के दौरान पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि जीवन में कुछ प्रयत्न से, कुछ जुगाड़ से और बहुत कुछ भगवत कृपा से प्राप्त होता है। धर्म और परमार्थ की यात्रा का सुयोग भी भगवत कृपा से ही मिलता है, और इस सेवा के सुअवसर को जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानना चाहिए। उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में सबसे आसान ‘व्हॉट्सऐप यूनिवर्सिटी’ हो गई है, जो केवल संदेश भेजती है, जानती कुछ भी नहीं। यही आज के समाज की बड़ी विडंबना है।
उन्होंने कहा कि सतयुग में ध्यान द्वारा, त्रेता में गुरुकुलों द्वारा, द्वापर में जीव की गति के अनुसार उसकी मति कथा सुनती थी और कलियुग में स्वयं कथा स्थल पर जाकर श्रवण करना ही विधि है। कथा व्यास ने स्पष्ट किया कि जीवन में संशय नहीं होना चाहिए क्योंकि संशय के जलने पर ही श्रद्धा जन्म लेती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति पर भगवान को मानने का दबाव नहीं डालना चाहिए। सनातनियों की भीड़ हर स्थान पर है, इससे सावधान रहना आवश्यक है। प्रत्येक सनातनी को पंचदेवों की पूजा के अतिरिक्त किसी अन्य की पूजा नहीं करनी चाहिए।
अंत में पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज ने शिव-विवाह का प्रसंग सुनाकर कथा सत्र को विराम दिया।
रामकथा में नगरसेविका कल्पना नगपुरे, नगरसेवक अभय कक्कड़, नगरसेवक विशाल जाधव, समाजसेवक कुंअर संजय सिंह, राघवेंद्र सेवा मंच के अध्यक्ष सुरेंद्र मिश्र, विक्रम प्रताप सिंह, दीपक नंदलाल सिंह, जयप्रकाश सिंह, गणेश अग्रवाल, अविनाश मिश्रा, आर. डी. सिंह, अमित सिंह मास्टर, सनी सिंह, विशाल सिंह, श्रीमती अशोका तिवारी, सुधा दूबे, निशा शर्मा, प्रिया सिंह, रेखा गुप्ता, सरिता चौबे तथा कथा व्यवस्था संभालने वाले प्रिंस बिजेन्द्र सिंह सहित अनेक गणमान्य जनों ने मानस महाकुंभ में अवगाहन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
