
● वसई
“आओ गायें रामकथा घर-घर में” आध्यात्मिक आंदोलन की अलख देश-विदेश तक जगाने वाले, मानस के सिद्ध साधक और व्यवहार-घाट के ओजस्वी प्रवक्ता, क्रांतिकारी संत प्रेममूर्ति पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज ने मिथिला प्रसंग के आश्रय में रामकथा गायन करते हुए कहा कि भगवान के रामावतार में तीन लीलाएँ विशेष हैं; संस्कार लीला, श्रृंगार लीला और संहार लीला। मिथिला भक्ति-भूमि है, जहाँ जगत-जननी जगदंबा सीता स्वयं अवतरित हुईं। मिथिला की इसी पावन भूमि पर भगवान की श्रृंगार लीला प्रारंभ होती है। पूज्यश्री ने आत्मानुभव सुनाते हुए कहा कि कलिकाल में भी मिथिला और यहाँ के लोगों का अयोध्या के प्रति प्रेम-भाव त्रेता जैसा ही है।
पूज्य महाराजश्री ने धनुषयज्ञ प्रसंग की अद्भुत प्रस्तुति से श्रोताओं का जनसमूह रोमांचित कर दिया। उन्होंने कहा कि वैचारिक स्तर पर ऐक्य होगा, तभी व्यवहारिक ऐक्य स्थापित होगा। अतः वैवाहिक संबंध स्थापित करते समय इस बात का सदैव स्मरण रखना चाहिए।
पूज्यश्री ने बताया कि शिष्य का उत्कर्ष गुरु की तपस्या का परिणाम होता है। वेदमंत्रों के आश्रय में विवाह होने से वर-कन्या का मंगल होता है। शादी-विवाह में डीजे जैसे वाद्य-यंत्रों का उपयोग अर्थहीन है, इससे बचना चाहिए।
श्रोताओं की अपार भीड़ के बीच नगरसेवक सचिन देसाई, नगरसेवक गंगेश्वर श्रीवास्तव, नगरसेविका डिम्पल सिंह, के.आर. सिंह, ददन सिंह, गणेश अग्रवाल, अविनाश मिश्रा, सनी सिंह, अशोका तिवारी, सुधा दूबे, निशा शर्मा, प्रिया सिंह, रेखा गुप्ता, सरिता चौबे सहित कथा-व्यवस्था संभालने वाले प्रिंस बिजेन्द्र सिंह आदि गणमान्य जनों ने उपस्थित रहकर मानस महाकुंभ में अवगाहन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
