■ ऊर्जा सुरक्षा पर मंथन, पीएम मोदी ने राज्यों संग साधा तालमेल

● नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की ऊर्जा सुरक्षा की व्यापक समीक्षा के लिए मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की। इस पहल का उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करते हुए ईंधन आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना और किसी भी वैश्विक संकट से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारी सुनिश्चित करना है।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को लचीला और सक्षम बनाया जाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का देश पर न्यूनतम असर पड़े। केंद्र सरकार ने ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाए हैं, वहीं इनके प्रभावी क्रियान्वयन में राज्यों की भूमिका को अहम माना गया।
हाल ही में प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया की स्थिति के भारत पर दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर आगाह किया था। उन्होंने COVID-19 महामारी के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय ‘टीम इंडिया’ की भावना ने देश को संकट से उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी भावना को दोहराते हुए उन्होंने राज्यों से आवश्यक वस्तुओं और ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रबंध करने का आग्रह किया।
आचार संहिता के चलते चुनावी राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं हुए। इन राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ अलग से चर्चा की जाएगी।
इस वर्चुअल बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ आंध्र प्रदेश के चंद्रबाबू नायडू, छत्तीसगढ़ के विष्णु देव साई, तेलंगाना के रेवंत रेड्डी, उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, जम्मू-कश्मीर के उमर अब्दुल्ला, पंजाब के भगवंत मान, मध्य प्रदेश के मोहन यादव, झारखंड के हेमंत सोरेन, उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी, गुजरात के भूपेन्द्र पटेल और महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस समेत कई मुख्यमंत्री जुड़े।
