■ सूर्यकांत उपाध्याय

जीवन में रिश्तों की असली कीमत तब समझ में आती है, जब समय कठिन हो जाता है। छोटी-छोटी गलतफहमियाँ अपनों को दूर कर देती हैं, पर सच्चे रिश्ते कभी पूरी तरह टूटते नहीं।
यह कहानी दो भाइयों, विनय और सुमित की है। दोनों के बीच वर्षों से बोलचाल बंद थी। इसी बीच विनय को पता चला कि एक जमीन विवाद के केस में सुमित उसके खिलाफ गवाही देने वाला है। यह सुनकर वह टूट गया। पत्नी नीता के कहने पर भी वह भाई से संपर्क नहीं कर सका।
दरअसल, विनय ने अपने दोस्त राकेश के साथ जमीन खरीदी थी। समय के साथ जमीन की कीमत बढ़ी, पर राकेश अपने वादे से मुकर गया और मामला कोर्ट तक पहुँच गया।
कोर्ट में राकेश के वकील ने विनय को बेईमान साबित करने की कोशिश की और सुमित को गवाह के रूप में बुलाया। सबको लगा कि सुमित अपने भाई के खिलाफ बोलेगा।
लेकिन सुमित ने सच का साथ दिया। उसने कहा कि उसके भाई ने हमेशा ईमानदारी और मदद का रास्ता चुना है। साथ ही उसने खुलासा किया कि विरोधी पक्ष ने उसे लालच देकर झूठ बोलने के लिए उकसाया था, जिसकी उसने रिकॉर्डिंग भी की है।
इस साक्ष्य के आधार पर कोर्ट ने फैसला विनय के पक्ष में सुनाया और राकेश के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए।
बाद में, विनय जब सुमित के घर पहुँचा, तो दोनों भाई गले लगकर रो पड़े। वर्षों की दूरियाँ पलभर में खत्म हो गईं और परिवार फिर से एक हो गया।
● सीख: कठिन समय में अपने ही सबसे बड़ी ताकत बनते हैं।
