
● नई दिल्ली
वैश्विक तनाव, ईरान और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों ने भारत को अपनी ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव करने पर मजबूर किया है। अब भारत एक ही देश पर निर्भर रहने के बजाय तेल आपूर्ति के स्रोतों में विविधता ला रहा है। इसी क्रम में अफ्रीकी देश अंगोला भारत के लिए एक महत्वपूर्ण तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है।
हाल ही में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने अंगोला से करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है, जिसमें हंगो और क्लोव ग्रेड शामिल हैं। यह सौदा एक्सॉनमोबिल के माध्यम से हुआ। इन ग्रेड्स को एशियाई रिफाइनरियों के लिए उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इनसे पेट्रोल और डीजल का अधिक उत्पादन संभव है।
अंगोला, नाइजीरिया के बाद अफ्रीका का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और इसके पास विशाल भंडार मौजूद हैं। ऐसे में भारत के लिए यह एक स्थिर विकल्प बनता जा रहा है। भारत ने इसके साथ ही अबू धाबी, ब्राजील और अन्य देशों से भी तेल खरीद बढ़ाई है, जिससे सप्लाई चेन को संतुलित और सुरक्षित किया जा सके।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस सस्ते तेल के कारण भारत का प्रमुख सप्लायर बना था, लेकिन प्रतिबंधों के चलते अब आयात में कमी आई है। दिसंबर में रूसी तेल आयात दो साल के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि ओपेक और अफ्रीकी देशों से आयात बढ़ा है।
एलएनजी आयात में भी बदलाव दिखा है। मार्च 2026 में कुल आयात में गिरावट दर्ज हुई, वहीं कतर से आपूर्ति घटी और अमेरिका, ओमान, नाइजीरिया व अंगोला से आयात बढ़ा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह रणनीति भारत को ऊर्जा सुरक्षा देने के साथ वैश्विक दबावों से संतुलित तरीके से निपटने में मदद करेगी।
