
● मुंबई
महाराष्ट्र स्कूल शिक्षा विभाग ने अभिभावकों को बड़ी राहत देते हुए राज्यभर के स्कूलों के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। अब कोई भी स्कूल विद्यार्थियों या उनके माता-पिता को यूनिफॉर्म, पाठ्यपुस्तकें या अन्य शैक्षणिक सामग्री किसी एक तय दुकान या विक्रेता से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा।
नए शैक्षणिक सत्र से ठीक पहले जारी इस सर्कुलर का उद्देश्य स्कूलों में लंबे समय से मिल रही मुनाफाखोरी की शिकायतों पर लगाम लगाना है। विभाग ने साफ किया है कि यह आदेश राज्य के सभी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों पर समान रूप से लागू होगा और इसका पालन अनिवार्य होगा।
शिक्षा विभाग ने स्थानीय शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अभिभावकों की शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी तंत्र तैयार किया जाए। इसके तहत प्रत्येक क्षेत्र में शिकायत दर्ज कराने के लिए अलग ईमेल आईडी जारी की जाएगी और मामलों के त्वरित निपटारे के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। इससे अभिभावकों को सीधे प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने में सहूलियत मिलेगी।
यह निर्णय 11 जून, 2004 को जारी सरकारी प्रस्ताव की पुनः पुष्टि भी है, जिसमें पहले ही स्कूलों को किसी एक विक्रेता से खरीदारी के लिए मजबूर करने पर रोक लगाई गई थी। बावजूद इसके कई स्थानों पर नियमों की अनदेखी जारी थी, जिस पर अब सरकार ने सख्त रुख दिखाया है।
सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्देशों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस कदम से अभिभावकों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब वे अपनी जरूरत और बजट के अनुसार कहीं से भी यूनिफॉर्म और किताबें खरीद सकेंगे।
