■ सूर्यकांत उपाध्याय

49 दिन बाद जब निधि ने सासु माँ की चारपाई का पुराना गद्दा हटाया, तो उसमें छिपी चीज़ देखकर उसका दिल धक से रह गया। हाथ कांपने लगे और वह समझ नहीं पा रही थी कि आखिर इतने वर्षों तक यह बात उससे क्यों छुपाई गई।
निधि की शादी को दो महीने ही हुए थे, जब सास कमला देवी को याददाश्त खोने की बीमारी का पता चला। धीरे-धीरे वह अपनों को पहचानना भूलने लगीं। परिवार के बाकी लोग अपनी दुनिया में व्यस्त हो गए, पर निधि ने पूरे आठ साल तक बिना शिकायत उनकी सेवा की, दवाइयाँ, खाना, देखभाल, रातों की नींद तक त्याग दी।
कभी सास उसे बेटी कहतीं, तो कभी पहचान ही नहीं पातीं। निधि को दुख होता, पर उसने सेवा नहीं छोड़ी। 49 दिन पहले सासु माँ का निधन हो गया। अंतिम क्रिया के बाद निधि ने उनका कमरा बंद कर दिया और हिम्मत नहीं जुटा पाई कि दोबारा वहां जाए।
49वें दिन जब उसने गद्दा हटाया, तो उसमें छुपा एक पत्र मिला। उसमें लिखा था कि भले ही वह उसे पहचान न पाएं, पर उन्होंने उसे हमेशा बेटी की तरह चाहा। इसके साथ एक थैली में गहने भी थे, जिन्हें उन्होंने निधि के नाम किया था।
सबसे अंत में एक तिजोरी में घर की ऊपरी मंजिल के कागज मिले, वह भी निधि के नाम थे। साथ ही एक भावुक पत्र, जिसमें उन्होंने लिखा था कि निधि ने उनके जीवन को सम्मान दिया, इसलिए वह अपना सब कुछ उसे सौंप रही हैं।
यह देखकर निधि फूट-फूटकर रो पड़ी। उसे एहसास हुआ कि सास भले ही उसे पहचान नहीं पाती थीं, पर दिल से वह हमेशा उसे अपनी बेटी मानती थीं।
● संदेश: सच्चा रिश्ता पहचान से नहीं, भावनाओं से बनता है।
